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प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है वनदेवी धाम

Mau Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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रानीपुर। परदहां ब्लाक के कहिनौर गांव स्थित वनदेवी धाम पौराणिक स्थल है। यहां पर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लोग मत्था टेकने के लिए आते हैं, लेकिन शासन प्रशासन की ओर से इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप मेें विकसित करने की ठोस योजना तक नहीं बनायी जा सकी है। इस पौराणिक धरोहर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग उठने लगी है।
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जनश्रुतियों और भौगोलिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्थान महर्षि बाल्मिकी की साधना स्थली रहा है। कहा जाता है कि जगत जननी सीता ने भी अपने अखंड पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए यहीं पर लव-कुश को जन्म दिया था। इस प्रकार यह स्थान आदि पुरुष बाल्मिकी, मर्यादा पुरुषोत्तम राम तथा माता सीता से जुड़ा हुआ है। एक कथा के अनुसार कालांतर में नर्वर के रहने वाले सिंघनुआ के बाबा को स्वप्न में देखा कि देवी कह रही हैं कि मैं यहां अकेली हूं। यहां आकर मेरी पूजा करो। अपने स्वप्न के आधार पर बाबा यहां आए तथा देवी की खोज करने लगे, जहां आज वनदेवी का मंदिर है वहीं उन्हें प्रकाश दिखायी पड़ा। बाबा ने फावड़े से ही भूमि को खोदना शुरू कर दिया। खोदने पर वहां वनदेवी की मूर्ति दिखायी पड़ी। बाबा मूर्ति को अपने घर ले जाना चाहते थे, लेकिन उस मूर्ति को हटा तक नहीं सके और वहीं पर उन्होंने प्राण त्याग दिया था। उनकी मौत के बाद मां वनदेवी अपने सिंहासन के साथ प्रकट हुईं। यह पवित्र स्थान अपने सिद्घ महात्माओं के कारण भी चर्चा और आस्था का केंद्र बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों ने इस पौराणिक स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है।

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