अब अवहेलना महंगी पड़ेगी

Mau Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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मऊ। जिले के कान्वेंट सहित गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से गरीब बच्चों के अभिभावकों में खुशी है। कोर्ट का फैसला आने के बाद ज्यादातर कान्वेंट स्कूल के संचालक एक वर्ष पूर्व से ही गरीब बच्चों को नि:शुल्क सुविधा देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और है।
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दरअसल सर्वशिक्षा अभियान के बाद गरीब बच्चों की बेहतर शिक्षा की बेहतरी के लिए आरटीई लाया गया। इसके तहत उन बच्चों को भी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने का अधिकार मिला जो आर्थिक रूप से गरीब थे।  जिले में माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्ध 450 से अधिक मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। इसके अलावा दर्जनों कान्वेंट स्कूल हैं। कान्वेंट स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला मिलना सपना सरीखा होता है। इसके लिए वर्ष 2013 में आरटीई के तहत गरीब बच्चों को पहली कक्षा में विद्यालय की कुल सीटों का 25 प्रतिशत दाखिला देने संबंधी गाईडलाइन शासन की ओर से जारी की गई थी। लेकिन तकनीकी अड़चन के चलते गरीब बच्चों को लाभ नहीं मिल पाया। अब सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग जाने से गरीब बच्चों को प्रवेश मिलने की राह आसान नजर आ रही है। तकनीकी अड़चनों पर नजर डालें तो आईसीएसई, सीबीएसई सहित अन्य बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों पर जिला विद्यालय निरीक्षक तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का नियंत्रण नहीं रहता है। ऐसे में अधिकारी शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग को पत्र भेजने की बात कह रहे हैं। हाल यह है कि गरीब बच्चों के अभिभावकों द्वारा प्रशासन की ओर से पारदर्शी प्रणाली विकसित किए जाने की मांग की जाने लगी है। ज्यादातर कान्वेंट स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया बंद कर ली गई है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को शासन- प्रशासन कितना क्रियान्वयन करा पाता है यह तो समय ही बताएगा।
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