सरप्लस मामले में आख्या शून्य मिली तो कार्रवाई

Mau Updated Thu, 24 Oct 2013 05:39 AM IST
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मऊ। सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मियों के सरप्लस मामले में शासन ने अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरप्लस कर्मियों के रुके वेतन की समस्या के समाधान के लिए शासन के विशेष सचिव ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और संयुक्त शिक्षा निदेशकों से तीन चरणों में पंद्रह दिनों के अंदर प्रकरणों की परीक्षण रिपोर्ट मांगी है। आख्या शून्य पाए जाने पर महकमे के जिम्मेदार का वेतन रोकने सहित कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध सहायता प्राप्त स्कूलों और कालेजों में विभाग की ओर से मनमाने तरीके से जनशक्ति का निर्धारण किए जाने से शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों को सरप्लस में डाल दिया गया है। जबकि विद्यालयों में भारी संख्या में पद रिक्त हैं। आजमगढ़ मंडल के 136 विद्यालयों के 661 के साथ ही प्रदेश के 40 जनपदों में 898 विद्यालयों के 2890 सरप्लस शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों का चिह्नांकन किया गया है। मंडल के सरप्लस विद्यालयों पर नजर डाला जाए तो मऊ में 67 सहायता प्राप्त विद्यालयों के सापेक्ष 39 विद्यालयों में 100, बलिया में 91 के सापेक्ष 55 विद्यालयों के 261, आजमगढ़ के 97 के सापेक्ष 42 विद्यालयों में 300 सहित 40 जनपदों के 898 विद्यालयों में 2890 शिक्षक, शिक्षणेतर कर्मचारियों को सरप्लस दिखाया गया है। जबकि सरप्लस से कहीं दुगुना से भी ज्यादा पद रिक्त चल रहा है।
उच्च न्यायालय के आदेश पर शासन प्रशासन अब की नींद टूटी है। शासन की ओर से सरप्लस मामले में गत 26 सितंबर को विभाग से प्रकरणों के विभिन्न बिंदुओं पर सूचना मांगी गई थी, लेकिन मामले पर ध्यान नहीं दिया गया था। अब शासन के विशेष सचिव ने शिकंजा कसते हुए 40 जनपदों के जिला विद्यालय निरीक्षक, मंडलीय उप शिक्षा निदेशक, संयुक्त शिक्षा निदेशक जिम्मेदार ठहराते हुए प्रकरणों का तीन चरणों में परीक्षण के लिए शिक्षा निदेशक माध्यमिक को निर्देश दिया है। साथ ही प्रगति आख्या 21, 25 और 29 अक्तूबर को ईमेल के माध्यम से रिपोर्ट करने का आदेश दिया है। आख्या शून्य पाए जाने पर जिला विद्यालय निरीक्षकों सहित मंडलीय अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ मंडल अखिलेश पांडेय का कहना था कि सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों के सरप्लस मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर से प्रकरणों का परीक्षण कराया जा रहा है।
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