कर्ज से लदे चीनी मिल के भविष्य पर संकट

Mau Updated Fri, 25 Oct 2013 05:40 AM IST
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घोसी। किसान सहकारी चीनी मिल पर भारी कर्ज से लदे होने के कारण उसके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। मिल को क्षमता के अनुरूप गन्ना नहीं मिलने से वह ढाई-तीन माह में चलकर बंद हो जाती है। इससे मिल को आय से अधिक धन खर्च करना पड़ जाता है, जिससे मिल पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। हालत ऐसी ही रही तो जिले की एकमात्र चीनी मिल बंद भी हो सकती है।
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घोसी के किसान सहकारी चीनी के प्रथम पेराई सत्र का शुभारंभ पांच दिसंबर 1984 में हुआ था। शुरुआत के आठ नौ वर्षों तक चीनी मिल की हालत अच्छी रही है। तब मिल की क्षमता सिंगल प्लांट थी। लेकिन 1993 में इसकी पेराई क्षमता बढ़ाने के लिए डबल प्लांट कर दिया गया। अब मिल को इसके क्षमता के अनुसार गन्ना ही नहीं मिल पा रहा है। मिल के घाटे का आलम यह है कि इस मिल से उत्पादित चीनी का मूल्य 56 हजार 272 रुपये प्रति कुंटल पड़ रहा है जबकि चीनी 2900 रुपये कुंटल ही बेचना पड़ता है। जानकार बताते हैं कि मिल के घाटे की वजह यहां आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति भी रही है। स्थायी और अस्थायी मिलाकर मिल में कुल 635 कर्मचारी हैं। जबकि जरूरत मात्र साढ़े चार सौ कर्मचारी की ही है। डेढ़ दो सौ अतिरिक्त कर्मचारियों के वेतन आदि के मद में प्रति माह करीब 18 से 25 लाख रुपये मिल पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। हालांकि तीन माह से कर्मचारियों को भी वेतन नहीं मिला है।
गन्ने की कम आपूर्ति भी घाटे की वजह
गन्ने की खेती की सर्वे रिपोर्ट के सापेक्ष कम आपूर्ति भी मिल के घाटे की वजह है। वर्ष 2010 से ही रिपोर्ट और आपूर्ति पर गौर करें तो संभावित सप्लाई और आपूर्ति में भारी अंतर का पता चलता है। 2010 में 7825 हेक्टेयर गन्ने का सर्वे हुआ था। अनुमानित आपूर्ति थी 32.80 लाख कुंटल गन्ने का लेकिन सप्लाई हुआ मात्र 12.37 लाख कुंटल गन्ना। 2011-12 में 8764 हेक्टेयर क्षेत्रफल के गन्ने का सर्वे हुआ। सप्लाई होनी थी 37.73 लाख कुंटल गन्ने का लेकिन मिल को मिला 18.15 लाख कुंटल ही गन्ना। 2012-13 में 9324 हेक्टेयर गन्ने के क्षेत्र का सर्वे हुआ। मिल को गन्ना मिलना था 40 लाख कुंटल लेकिन मिला 22.08 ही कुंटल। शुरू होने वाले पेराई सत्र के लिए 11579.28 हेक्टेअर गन्ने की फसल का सर्वे हुआ है। मिल को गन्ना मिलना चाहिए 54.50 लाख कुंटल लेकिन मिलेगा कितना मिल चालू होने के बाद चलेगा।

बंदी की आशंका से दहशत में हैं गन्ना किसान
चीनी मिल से क्षेत्र के करीब 15 हजार गन्ना किसान जुड़े हैं। गन्ना ही उनका कैश क्राप है। उनकी भविष्य की योजनाएं गन्ने पर ही टिकी रहती है। वे खुशनसीब हैं कि उनके गन्ने का भुगतान समय पर हो जा रहा है। जिले के गन्ना किसानों का कुल बकाया 63 करोड़ 16 लाख 33 हजार का भुगतान कर दिया गया है। घाटे में चल रहे इस चीनी मिल के बंद होने की आशंका से क्षेत्र के गन्ना किसान दहशत में है।

मिल पर है दो अरब 39 करोड़ का कर्ज प्रधान प्रबंधक
मिल के प्रधान प्रबंधक आरवी यादव का कहना है कि मिल भारी घाटे में चल रही है। मिल पर जितना कर्ज है उसके ब्याज के रूप में ही प्रति वर्ष 2.5 करोड़ देना पड़ता है। बताया कि मिल पर कुल दो अरब 39 करोड़ रुपये का कर्ज है। इससे तभी उबरा जा सकता है जब मिल का पेराई सत्र छह तक का हो। साथ ही किसान गुणवत्ता परक गन्ने की खेती करें। क्षेत्र से अभी जिस किस्म के गन्ने की सप्लाई आ रही है उससे चीनी का उत्पादन मानक के अनुकूल नहीं हो रहा है। उन्होंने इसके लिए क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपेक्षा की है । कहा कि मिल के माली हालत को पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत हूं।
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