सपा उम्मीदवारों की अग्निपरीक्षा

Mau Updated Wed, 23 Oct 2013 05:39 AM IST
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मऊ। लोकसभा के लिए टिकटों की घोषणा कर सबसे पहले चुनावी दस्तक देने वाली सपा का पूर्वांचल की धरती आजमगढ़ से 29 अक्तूबर को चुनाव प्रचार का शंखनाद होगा। सपा ने इसे महारैली की संज्ञा दी है। आजमगढ़ पूर्वांचल का सबसे बड़ी आबादी वाला जिला है। जहां यादव तथा अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं। इस रैली को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह संबोधित करेंगे। मुमकिन है रैली में आजम खां भी आएं। यह रैली सपा के प्रति पूर्वांचल के अल्पसंख्यकों के नजरिए का पैमाना भी होगी।
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आजमगढ़ से सपा के चुनावी शंखनाद का अपना निहितार्थ है। मुजफ्फरनगर दंगे की वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक सपा से खफा हैं। दंगे का असर पूर्वांचल के अल्पसंख्यकों पर कितना है, आजमगढ़ की रैली से यह भी साफ होगा। दूसरी बात सपा ने आजमगढ़ और अगलबगल के संसदीय सीटों पर ही उम्मीदवारों की अदला बदली की है। रैली के बहाने टिकट पाए उम्मीदवारों की राजनैतिक हैसियत का आकलन भी होगा। सपा ने आजमगढ़, गाजीपुर तथा लालगंज के अपने उम्मीदवारों को बदला है। गाजीपुर में तो तीन बार उम्मीदवार बदले गए। इस क्षेत्र से वर्तमान सांसद का टिकट काटकर बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या को उम्मीदवार बनाया गया है। इसी तरह लालगंज से दरोगा सरोज का टिकट काटकर बेचई सरोज को उम्मीदवार बनाया गया है।
बहरहाल आजमगढ़ की रैली से सपा प्रमुख आसपास के कई संसदीय क्षेत्रों का माहौल परखेंगे। हो सकता है इस रैली के बाद टिकटों का एक बदलाव और हो। सपा के लिए इस बार मऊ जिले का घोसी लोकसभा क्षेत्र भी कम प्रतिष्ठापरक नहीं है। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय सचिव राजीव राय को इस क्षेत्र से टिकट दिया है। वे मूल रूप से बलिया जिले के रहने वाले हैं। उनका बंगलूरू में शिक्षा का व्यवसाय है। करीब 16 लाख मतदाता वाले घोसी लोकसभा क्षेत्र में सपा के परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले यादवों तथा अल्पसंख्यकों की तादाद क्रमश: एक लाख पचपन हजार दो लाख है। यहां राय मतदाताओं की संख्या भी एक लाख के आसपास है।
2009 के चुनाव में पार्टी ने यहां से अरशद जमाल को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें करीब 1,59750 वोट मिले। करीब 60 हजार वोटों के अंतर से वे बसपा उम्मीदवार से हार गए थे।वर्तमान लोकसभा में आजमगढ़ मंडल के आजमगढ़ सदर , घोसी और लांलगंज से सपा के सांसद नहीं हैं। आजमगढ़ रैली इन तीनों संसदीय क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अग्निपरीक्षा जैसी है।
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