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अंबेडकर विद्यालयों के 74 शिक्षकों पर लटक रही तलवार

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 25 May 2019 10:51 PM IST
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मऊ। जिले में समाज कल्याण द्वारा संचालित अंबेडकर प्राथमिक विद्यालयों के दो साल पहले 74 शिक्षकों की नियुक्ति में की गई धांधली की जांच में 22 अध्यापकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र संदिग्ध होने की रिपोर्ट समाज कल्याण निदेशक ने अपनी संस्तुति के साथ शासन को भेज दिया है। यदि शासन से इस रिपोर्ट पर कार्रवाई हो गई तो जिले के इन 22 अध्यापकों की नौकरी जानी तय मानी जा रही है। अगर जांच विस्तृत और निष्पक्ष तरीके से हो गई तो 74 अध्यापकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। नियुक्ति में अनियमितता के चलतेेे 24 फरवरी 2018 को 20 अंबेडकर विद्यालयों के प्रबंधकों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज है जिसकी विवेचना लंबित है।
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अंबेडकर स्कूलों में सहायक 74 अध्यापकों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई तो 24 फरवरी 2018 को तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने बीएसए कार्यालय पर औचक छापा मारकर अंबेडकर विद्यालयों के अध्यापकों की नियुक्तियों के अनुमोदन संबंधी पत्रावलियों की तलाश किया था। उस समय केवल 32 अध्यापकों के अनुमोदन की फाइलें मिली थीं जिन्हें डीएम ने ट्रेजरी के लाकर में जमा करा दिया। इसके बाद डीएम ने प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच टीम गठित किया। मामला संदिग्ध पाए जाने पर डीएम के निर्देश पर बीएसए और समाज कल्याण अधिकारी ने 20 अंबेडकर विद्यालयों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दिया। उधर समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर संयुक्त निदेशक समाज कल्याण सुनील कुमार सिंह बिसेन की अध्यक्षता में जिला समाज कल्याण अधिकारी चंदौली और डीडीआर गोंडा की तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन करके प्रत्येक अध्यापक के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच कराई। जांच के दौरान समिति ने पाया कि 42 अध्यापकों के अनुमोदन ही नहीं हैं। जबकि 32 अध्यापकों का अनुमोदन फर्जी है। जबकि 16 अध्यापकों के टीईटी के प्रमाणपत्र नेट पर नहीं दिख रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य के शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी संदिग्ध पाए गए। हालांकि इस मामले में शिकायत कर्ता गांव बचाओ मोर्चा के यूू पी राय द्वारा इस जांच में भी कई संदिग्धों को बचाने के प्रयास के आरोप लगाए गए हैं फिर भी छह अध्यापकों की सेवा समाप्ति की सिफारिश के साथ अन्य 16 अध्यापकों के भी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के संदिग्ध होने की बात मानते हुए 13 फरवरी 2019 को अपनी रिपोर्ट निदेशक समाज कल्याण को भेज दिया। जहां से अपनी संस्तुति के साथ निदेशक ने यह रिपोर्ट शासन को भेज दिया है। सूत्रों की माने तो अगर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई गई तो सभी 74 अध्यापकों की नौकरी जा सकती है।

इनसेट=
राष्टपति को पत्र भेजकर हस्तक्षेप करने की गुहार
मऊ। इस मामले में गांव बचाओ मोर्चा की तरफ से राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर फर्जीवाड़ा में शामिल सभी लोगों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई कराने की मांग की गई है।

कोट =
यह प्रकरण अब शासन स्तर पर है, यह प्रकरण मेरे द्वारा यहां कार्यभार संभालने से काफी पहले का है।
= विनोद यादव ,जिला समाज कल्याण अधिकारी, मऊ।
सुभाष यादव

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