ब्रजयात्रा ने की नंदीश्वर पर्वत की परिक्रमा

Agra Bureauआगरा ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2020 12:03 AM IST
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फोटो 4+5 राधा रानी ब्रज यात्रा में शामिल भक्त गण।
फोटो 4+5 राधा रानी ब्रज यात्रा में शामिल भक्त गण। - फोटो : MATHURA

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नंदगांव (मथुरा)। मान मंदिर सेवा संस्थान द्वारा संचालित श्रीराधारानी वार्षिक ब्रजयात्रा ने नंदगांव पड़ाव के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को नंदीश्वर पर्वत की परिक्रमा की। यात्रियों ने श्रीकृष्ण के लीला स्थलों के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। प्रात: छह बजे से ही यात्रियों ने लीलास्थलों पर पहुंचना शुरू कर दिया।
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ब्रजयात्रा उद्धव क्यारी, नंद बैठक, हाऊ-बिलाऊ, चरण पहाड़ी, पनिहारी कुंड, पावन सरोवर, मोती कुंड, आसेश्वर माहदेव, कदंबबटेर, कृष्ण कुंड आदि लीला स्थलों के दर्शन कर पड़ाव स्थलों पर पहुंची। बरसाना शरण ने नंदगांव के लीला स्थलों का महत्व बताया। यात्रा प्रबंधन देख रहे ब्रजदास उर्फ सुनील सिंह ने बताया कि गत वर्षों में 15 से 20 हजार तक यात्री निशुल्क यात्रा करते थे, लेकिन इस बार कोराना के चलते केवल 150 लोगों को यात्रा कराने की ही अनुमति मिली है। कोराना काल ने 1988 की पहली यात्रा की याद दिला दी है। पद्मश्री रमेश बाबा ने 1988 में 150 यात्रियों से ही यात्रा की शुरुआत की थी। इस यात्रा में कम यात्री होने के कारण अधिक से अधिक लीला स्थलों तक पहुंच रहे हैं।
13 वर्ष से लगातार यात्रा कर रहे बाबा सूरदास
तीन वर्ष की उम्र से नेत्रहीन 62 वर्षीय सूरदास बाबा इस बार 14वीं वार्षिक ब्रजयात्रा कर रहे हैं। बीकानेर राजस्थान निवासी सूरदास बाबा का कहना है कि सांसारिक कार्यों में उनका मन नहीं लगा। सब कुछ छोड़कर वह बहुत पहले ब्रज में संत रमेश बाबा की शरण में आ गए। तभी से वह ब्रज यात्रा करने लगे।
सेवानिवृत्ति लेकर कर रहीं ब्रजयात्रा
दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त सरोज बाला सोनीपत हरियाणा से हैं। पुलिस की नौकरी से वह यात्रा एवं अन्य धार्मिक कार्य नहीं कर पाती थीं। इसलिए उन्होंने निर्धारित उम्र सीमा से पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्त ले ली। 2003 से वह ब्रजयात्रा के लिए आती हैं। उनकी कुछ सहेलियां भी उनसे प्रेरित होती यात्रा में आती हैं।
लीलास्थलों के दर्शन से मिलता सौभाग्य
उज्जैन निवासी 62 वर्षीय रमाशंकर द्विवेदी की इस बार नौवीं यात्रा है। यात्रा में उन्हें बाबा के प्रवचन और कन्हैया के लीलास्थलों के दर्शनों का सौभाग्य मिलता है। यही उनके जीवन का उद्देश्य बनकर रह गया है। 70 वर्षीय राजस्थान के खेड़ा खिलनपुर निवासी सुशीला पिछले 7 वर्षों से ब्रजयात्रा में लगातार आ रही हैं। प्रतिदिन करीब 20 किमी की यात्रा के बाद उनके पैर दर्द भले ही करने लगते हों परंतु उनको शांति बहुत मिलती है।
रासौली होगा आज का पड़ाव
शुक्रावार को ब्रजयात्रा नंदगांव से अगल पडाव रासौली पहुंचेगी। ब्रजदास ने बताया कि संयोगवश द्वापर में शरद पूर्णिमा को रासौली में भी रास हुआ था। इस बार भी मान मंदिर की बालिकाएं रास पद का आयोजन करेंगी।
सभी संप्रदाय के लोग कर सकते हैं यात्रा
श्रीराधारानी ब्रजयात्रा में सभी संप्रदाय के लोग यात्रा कर सकते हैं। तमाम यात्रा संचालक अपने अनुयायियों को ही यात्रा कराते हैं, जबकि इस यात्रा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।
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