‘भक्ति से भी सुगम मार्ग प्रपत्ति’

Mathura Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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वृंदावन। परिक्रमा मार्ग रानापत घाट के समीप आचार्यपीठ में ठाकुर सत्यनारायण महाराज के सानिध्य में जगद्गुरु स्वामी रामानुजाचार्य जयंती महोत्सव मनाया गया। इसमें रामानुजाचार्य के विग्रह का पंचामृत दुग्धाभिषेक कर विशेष पूजन-अर्चन किया गया। वहीं बटुक ब्राह्मणों ने सामूहिक सस्वर आलविंदार, मुकुंद माला का पाठ किया।
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महोत्सव के अंतर्गत संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए स्वामी किशोरीरमणाचार्य महाराज ने कहा कि स्वामी यामुनाचार्य की परंपरा में जगद्गुरु स्वामी रामानुजाचार्य महाराज ने 12वीं सदी के आरंभ में विशिष्टाद्वैत दर्शन का अद्भुत विस्तार किया। रामानुज की पद्धति की मूलाधार वह दृष्टि है, जिसमें वे ईश्वर को जीव और प्रकृति से एकाकार देखते हैं। मारुतिनंदन वागीश ने कहा कि भक्ति से भी सुगम मार्ग प्रपत्ति है। जो पूर्ण समर्पण के साथ भगवान की शरण में गिरता है, उसे भगवान तुरंत अपना लेते हैं। इस अवसर पर आचार्य परशुराम पांडेय, रमेशचंद्र, केशवाचार्य, आचार्य देवेंद्र, पंडित योगेश, धराचार्य आदि उपस्थित थे।
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