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...तो कैसे न प्रदूषण से सिसके यमुना

Mathura Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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मथुरा। यमुनोत्री से अमृत धारा के रूप में बहने वाली यमुना ब्रज में पहुंचते-पहुंचते विष धारा में तब्दील हो रही है। इसमें देश का सिरमौर राजधानी दिल्ली की अहम भूमिका है। अकेले दिल्ली ही 17 विशाल नालों के माध्यम से यमुना में प्रतिदिन 35 करोड़ लीटर गंदा पानी उडे़ल रही है। कालिंदी की दुर्गति में इसे मां के रूप में पूजने वाला ब्रज भी भागीदार है। मथुरा और वृंदावन में भी दो दर्जन छोटे, बड़े नाले इसमें गिराए जा रहे हैं।
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हथिनी कुंड से कान्हा की नगरी तक 350 किलोमीटर का सफर तय करने वाली पतित पावनी यमुना करीब एक सैकड़ा विशालकाय नालों का दंश झेल रही है। यमुना बचाओ आंदोलन से जुटे संगठनों द्वारा जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि यमुना किनारे बसी देश की राजधानी दिल्ली से निकलने वाले 182 नालों का पानी 17 नालों में समाहित होकर यमुना में गिर रहा है। इसके बाद शाहदरा, हिंडेन, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, पलवल, होडल और कोसी के नाले भी इसी तरह सीधे यमुना में समाहित हो रहे हैं।

बाकी कसर यमुना को गंदा करने में खुद भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और क्रीड़ा स्थली ने पूरी कर दी है। यहां दो दर्जन से ज्यादा छोटे-बडे़ नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं। इसमें आधा दर्जन नाले वृंदावन और 19 नाले मथुरा के हैं। इसमें वृंदावन के चीरघाट, केसीघाट और तटीय स्थान पर चार बडे़ नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं। मथुरा शहरी क्षेत्र में यमुना का प्रत्येक घाट इस गंदगी का गवाह है।
सबसे भयावह स्थिति मसानी नाले की है। शहर का करीब 48 फीसदी गंदा पानी एकत्रित करने वाला यह नाला इन दिनों सीधे यमुना में गिर रहा है। औद्योगिक क्षेत्र से गुजरने के कारण इसमें जहरीले रसायनों की भी भरमार है। इस नाले पर एसपीएस (सीवेज पंपिंग स्टेशन) भी लगा है लेकिन ये अक्सर बंद ही रहता है।

बदल दी नाले की दिशा
मसानी नाले का बहाव यमुना में रोकने के बजाए नगर पालिका ने इसकी दिशा बदल दी है। पहले यह बड़ा नाला चक्रतीर्थ घाट, गऊ घाट होते हुए यमुना में गिरता था लेकिन अब इसे आकाशवाणी से ऊपर यमुना में गिराया जा रहा है। यह नाला करीब 20 एमएलडी गंदा पानी यमुना में बहा रहा है।

नालों पर सवा करोड़ खर्च
यमुना कार्य योेजना के तहत संचालित हो रहे एसटीपी और एसपीएस के संचालन के लिए मथुरा और वृंदावन नगर पालिकाएं करीब सवा करोड़ रुपया वार्षिक खर्च कर रही हैं। इसका मकसद यमुना में नालों के पानी को जाने से रोकना है लेकिन ये संपूर्ण प्रयास योजना की उक्त धनराशि के बंदरबांट तक सिमट कर रह गया है। हालांकि बहाना क्षमता से ज्यादा उत्सर्जित पानी का बनाया जाता है।

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