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देश के सिपाही का अंतहीन दर्द...

Mathura Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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मथुरा। यह अंतहीन दर्द है। बिस्तर पर पड़े-पड़े 15 बरस हो चुके हैं। यह कहानी बेडसोर (बेड पर पड़े रहने से शरीर में घाव होने की बीमारी) से पीड़ित उस पूर्व सैनिक की है जिन्होंने देश की आन बान और शान की खातिर प्राणों की परवाह न कर ऑपरेशन रक्षक में भाग लिया। उसी दौरान दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई, तब से आज तक वह बिस्तर पर ही हैं। सेना ने उन्हें दोयम दर्र्जे का बताकर डेंजरस ऐरिया के लाभोें से भी वंचित कर दिया। शारीरिक कष्ट के साथ ही सेना से मिली उपेक्षा का दर्द अब वो और नहीं सहना चाहते। पूर्व सैनिक राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की गुहार लगा रहा है।
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थाना नौहझील के गांव बरौठ निवासी जेपी भारद्वाज दिसंबर 1980 में सेना में ईएमई में मोटर मेकेनिक के पद पर भर्ती हुए थे। जून 1996 में उन्हें जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में 10 राष्ट्रीय राइफल्स के आतंक निरोधी अभियान पर ऑपरेशन रक्षक में भेजा गया। 30 अक्टूबर 1997 को वे ऊधमपुर से सेना की एक्सीडेंटल गाड़ी को सही कराकर लौैट रहे थे तभी गाड़ी खाई में गिर गई। इसमें उनकी रीढ़ की हड्डी टूट जाने से उनके छाती से नीचे के शरीर ने काम करना बंद कर दिया। सेना के चंडीमंदिर चंडीगढ़ स्थित हॉस्पिटल में सात माह रखने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
भारद्वाज का आरोप है कि उन्हें पूना खिरकी हॉस्पिटल नहीं भेजा गया। बाद में पता चला कि उनका डिमोशनकर दो रैंक नीचे के पद पर ला दिया और मेडिकल बोर्ड बैठाकर उन्हें डिसएबल्ड करार कर घर भेज दिया। भारद्वाज सेनाधिकारियों और रक्षा मंत्री व स्थानीय सेना से गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। आखिर में उन्होंने सितंबर 2011 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी। लेकिन आज तक उनकी फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में पूर्व सैनिक जिंदा होकर भी बिस्तर पर हर दिन दम तोड़ रहा है।

पत्नी को सात साल बाद चपरासी की नौकरी
सेना में शरीर गंवा चुके सैनिक जेपी भारद्वाज की छह साल लिखा पढ़ी के बाद उनकी पत्नी रागिनी भारद्वाज को सेेना के एक ऑफिस में चार हजार की पगार पर चपरासी की वर्ष 2004 में नौकरी दी गई।

कर्जा से बेटे को बीटेक, बेटी को बीबीए कराई
शिक्षा को महत्व देने वाले भारद्वाज ने अपने दोस्तों से कर्जा लेकर बेटे लव भारद्वाज को बीटेक कराई, वहीं बड़ी बेटी क्षमा भारद्वाज को बीबीए कराई। बच्चों की पढ़ाई का कर्जा वह आज भी दोस्तों को किश्तों में चुका रहे हैं।

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