एफसीआई का अन्नदाता को झटका

Mathura Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
मथुरा। भारतीय खाद्य निगम की नीति ने मथुरा के धान किसानों को झटका दिया है। गोदामों में हरियाणा और पंजाब का चावल उतरने के चलते जनपद के राइस मिलों का चावल नहीं उतर पा रहा है। इसके चलते भुगतान का संकट खड़ा हो गया है।
इस बार केंद्रीय पूल में लेवी के चावल की खरीद की जा रही है। ऐसे में भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में राइस मिलों का चावल उतर रहा है। बीते दिनों हरियाणा और पंजाब के रेलवे रैक आने के चलते चावल उतरने की व्यवस्था चरमरा गई है। धान मिलों में चावल भरा होने के चलते मंडियों से धान की खरीद और भुगतान का संकट खड़ा हो गया है।
नौहझील क्षेत्र के किसान राजवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपना धान मंडी में एक दिसंबर को बेचा था। आढ़तिया ने मिल संचालकों से पैसा न आने का हवाला देते हुए एक माह बाद भुगतान करने का आश्वासन दिया है। गोवर्धन क्षेत्र के कुलदीप सिंह ने बताया मंडी में नगद भुगतान के लिए व्यापारी एक प्रतिशत की छूट ले रहे हैं।

फुल होने को है भंडारण की क्षमता
भारतीय खाद्य निगम के गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 32744 मीट्रिक टन है। इसमें वर्तमान में गोदाम में 18 हजार मीट्रिक टन गेहूं रखा है, वहीं हाल ही में पंजाब और हरियाणा से आई रैकों में 5700 मीट्रिक टन चावल उतर चुका है। 22 दिसंबर को एक रैक और प्रस्तावित है। ऐसे में गोदाम में मात्र पांच हजार मीट्रिक टन माल की जगह ही शेष रह जाएगी।

चावल का उत्पादन 12 लाख क्विंटल
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बार 45 हजार हेक्टेअर में धान की बुवाई हुई थी, जिसमें 25 हजार हेक्टेअर में बासमती और शेष 20 हजार हेक्टेअर में मोटे धान का उत्पादन हुआ। प्रति हेक्टेअर 55 से 60 क्विंटल का अनुमान है। ऐसे में मोटे चावलों के उत्पादन का आंकड़ा 12 लाख क्विंटल के आसपास बैठता है।
डीएम ने लिखा था पत्र
बाहरी प्रदेश के चावल आने से गोदाम पर स्थानीय चावल के उतरने में दिक्कतों की शिकायत पर जिला अधिकारी समीर वर्मा ने भी भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों को पत्र लिखकर बाहरी चावल न भेजने का आग्रह किया। बावजूद इसके रेलवे रैकों के आने का क्रम जारी है।

एफसीआई के गोदामों में माल न उतरने से राइस मिलों के गोदामों में चावल का स्टॉक बढ़ने लगा है। इससे एक तरफ मिल संचालक खरीद में कम रुचि ले रहे हैं तो दूसरी ओर भुगतान का संकट खड़ा होने लगा है।
- प्रतुल अग्रवाल ‘अलंकार’
प्रवक्ता, मथुरा राइस मिल एसोसिएशन, मथुरा।

गोदाम में पंजाब और हरियाणा का चावल आने के चलते स्टॉफ उसमें लग जाता है। इसी के चलते स्थानीय चावल के उतरने में दिक्कतें आ रहीं है। आरएफसी द्वारा आपूर्ति के लिए माल के उठान के चलते भंडारण की कोई समस्या नहीं आएगी।
- सोम प्रकाश गुप्ता
तकनीकी सहायक, एफसीआई मथुरा।
गोदामों में रखा 80 हजार क्विंटल धान-चावल
मथुरा। मथुरा राइस मिल एसोसिएशन के सचिव संदीप अग्रवाल ने बताया राइस मिल संचालक सीजन पर ही वर्ष भर का स्टॉक जमा करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस बार अब तक धान मिल संचालकों ने दो लाख क्विंटल धान की खरीद मंडियों से की है। इसमें से सरकार को लेवी में 80 हजार क्विंटल चावल तोला जाना है। लेकिन आधा सीजन निकलने के बाद मात्र 16 से 20 हजार क्विंटल चावल ही गोदामों उतर सका है। इसका विपरीत असर मिल संचालकों पर पड़ रहा है। उनके गोदामों में लगभग 60 से 80 हजार क्विंटल धान और चावल भरा पड़ा है। एसोसिएशन के पदाधिकारीयों का कहना है भारतीय खाद्य निगम पर हरियाणा और पंजाब की एसोसिएशन का दबाव रहता है। ये ही वजह है कि मथुरा के गोदामों हरियाणा, पंजाब का चावल रखा जा रहा है।

तो सरकार को लगेगी राजस्व की चपत
बाजार के जानकार बताते हैं कि इस बार एफसीआई केंद्रीय पूल में चावल की खरीद कर रही है। ऐसे में जितना माल की खरीद होगी उसी पर राज्य सरकार कोे वेट और मंडी शुल्क की प्राप्ति होगी। इस बार धीमी खरीद से सरकार को राजस्व की चपत लगना तय माना जा रहा है।

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