बृज की गायों में फैल रही ब्रुसलोसिस

Mathura Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
मथुरा। ब्रुसलोसिस बीमारी जनपद की गायों में तेजी से फैल रही है। इसकी पुष्टि गायों के लिए गए सैंपलों की जांच से हुई। इस लाइलाज बीमारी पर अगर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इसकी चपेट में समूचे बृज की गाएं आ सकती हैं।
ब्रुसलोसिस से देश भर के करीब तीन करोड़ पशु (गाय) पीड़ित हैं। इस बीमारी में गाय को बछड़ा देने से एक और दो माह पूर्व गर्भपात हो जाता है। पशु पालक को इस बात का पता तक नहीं लगता कि उसकी गाय इस लाइलाज बीमारी का शिकार हो चुकी है। इस बीमारी ने बृज क्षेत्र में भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। इस बात का पता गौशालाओं और जनपद के निजी पशु पालकों को उस समय लगा जब उन्होंने अपने जानवरों के सैंपलों की वेटरिनरी विश्वविद्यालय में जांच कराई। जनपद में चल रही कई गौशालाओं के संचालकों द्वारा अपने यहां पाली जा रही गायों के सैंपल लेकर जांच कराई जा रही है। इस बीमारी से गायों को बचाने के लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं।

कैसे फैलती बीमारी
ब्रुसलोसिस एक संक्रामक बीमारी है। इसमें गाय को समय से एक दो माह ही गर्भपात हों जाता है। जिस स्थान पर मृत बछड़ा गिरता है अगर वहां की सफाई नहीं की गई तो उस स्थान के संपर्क में आने वाली गायों में भी यह बीमारी फैल जाती है। इतना ही नहीं अगर गाय का चारा भी उस स्थान के संपर्क में आया तो वह भी संक्रमित हो जाता है।

वेटरिनरी लैब में हुई जांच में चेक सैंपलों का ब्यौरा
-22 सैंपलों में से 18 में ब्रुसलोसिस मिली
- 34 सैंपलों में से 22 गायों में यह बीमारी मिली
- शहर में 300 गायों की जांच में यह बीमारी 34 प्रतिशत पाई गई
- ग्रामीण इलाकों से मिले 700 सैंपलों में जांच करने पर नौ प्रतिशत में बीमारी पाई गई।

गौशालाओं में अधिक होती बीमारी
ब्रुसलोसिस गौशालाओं में रहने वाली गायों में अधिक होने के पीछे कई कारण हैं। पहला तो यह कि गौशालाओं में स्थान का अभाव होत है। दूसरा ये कि गोशालाओं में अगर किसी गाय को इस बीमारी के कारण गर्भपात हो भी जाता है तो वहां उतनी सफाई नहीं हो पाती और न सावधानी बरती जाती है।

वेटरिनरी डेरीफार्म में टीके का किया गया परीक्षण
मथुरा वेटरिनरी कालेज के डा. अमित कुमार ने बताया कि ब्रुसलोसिस के टीके का परीक्षण वेटरिनरी के डोरीफार्म में गायों पर किया गया, जिसका रिजल्ट सही पाया गया।

कैसे करें बीमारी से बचाव
मथुरा। वेटरिनरी कालेज के डीन डा. एसके गर्ग ने बताया कि :-
- गाय का ब्याने से तीन-चार माह पूर्व अधिक ध्यान दें
- गर्भपात के स्थान पर अच्छे से साफ-सफाई करें
- जमीन पर गिरे मृत बछड़े को सावधानी से उठा कर गाड़ दें
- गायों में समय-समय टीक ाकरण कराएं
- लक्षण दिखें तो वेटरिनरी कालेज में जांच कराएं और सलाह लें

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