हजारों श्रद्धालु बने द्वापर युग की दुर्लभ रात्रि के प्रतिबिंब के साक्षी

Mathura Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
वृंदावन। हां हां जी रच्यौ रास रंग, श्याम सब हीन सुख दीन रच्यौ रास रंग। द्वापरयुग की महारास लीला की पावन रात्रि एक बार फिर वृंदावन की पावन भूमि पर साकार हो उठी। जब रासेश्वर श्रीकृष्ण, श्रीराधारानी और गोपियों के 108 स्वरूपों सहित शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में जीवंत हुए इस महारास में थिरके तो संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
द्वापर की उस देव दुर्लभ रात्रि का प्रतिबिंब मथुरा-वृंदावन मार्ग स्थित श्री राधामाधव देवस्थान, जयपुर मंदिर में हजारों भक्तों ने एक साथ देखा। शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में आत्मा और परमात्मा एकाकार हो गए तो श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण हृदय भी आल्हादित हुए बिना नहीं रह सके। बस एकटक-अपलक-अभिभूत से इस अद्भुत समागम को निहारते रहे। साध्वी ब्रजदेवी के लाड़ले ठा. श्रीब्रजवल्लभ लाल की प्रेरणा से यह अपूर्व आयोजन जैसे ही अपने चरम की ओर बढ़ रहा था तो मानो द्धापर की वह रात्रि साकार हो रही थी जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोपागंनाओं के साथ उन्हें विशुद्ध प्रेमतत्व प्रदान करने के लिए वंशीवट यमुना तट पर महारास किया था।
श्रीराधारानी और गोपियों के निमित्त हुई इस लीला में प्रभु श्रीकृष्ण कभी नटराज बने तो कभी मयूर का रूप धारण कर नृत्य करने लगे। भक्तों और आचार्यों के पदों पर महारास की यह लीला अनुपम और अनूठी थी।

देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने अपलक निहारा महारास
वृंदावन। शरद पूर्णिमा को हुए इस भव्य आयोजन में वृंदावन के साथ ही नंदगाव, बरसाना, कमई, करहला, गोवर्धन, गोकुल, नंदगांव, दाऊजी, मथुरा, नीमगांव के अलावा राजस्थान के डीग और कांमा की लगभग चार दर्जन से अधिक विख्यात रासमंडलियों ने सहभागिता की। सौ फुट चौडे़ और सौ फुट लंबे मंच को प्राचीन यमुना किनारे के वंशीवट का रूप प्रदान किया गया। इस गोलाकार मंच पर सैकड़ों कृष्ण के स्वरूपों ने ब्रजांगनाओं के साथ शरद की धवल रात्रि में महारास किया। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रासाचार्य स्वामी फतेहकृष्ण जी महाराज के सानिध्य में हुए इस दिव्य लौकिक महारास के दर्शनों के लिए देश और विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने अपलक रसपान किया। श्रीराधा कृष्ण मंडल की संस्थापिका ब्रजदेवी के सान्निध्य में हुए इस दिव्य आयोजन में भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, सिंगापुर, फ्रांस से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर व्यवस्थापक रामनिवास शुक्ल, लालन प्रेमधन आदि उपस्थित थे।

इन मंडलियों ने की सहभागिता
वृंदावन (ब्यूरो)। जयपुर मंदिर में आयोजित महारास लीला में वेदप्रकाश, लेखराज, प्रभात, हरेकृष्ण, शिवदयाल, मुंशी स्वामी, दामोदर, अमीचंद, राधाकृष्ण, शिवराम, चौखे चंद्रपाता, राधेश्याम, ओमप्रकाश, नृत्य गोपाल, स्वामी सुरेश, श्रीगोपाल जी, ठाकुरलाल जी, घनश्याम जी, मुन्नालीाल, हरगोविंद जी, जगदीशजी, बदन श्याम, देवेंद्र जही, भगवान स्वरूप, वासुदेव, मोतीलाल जी, त्रिलोकचंद्र झम्मन, लालजी, शिवरामजी आदि की मंडलियों ने सहभागिता की।

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