पहली बार पंचक में हुआ रावण का वध

Mathura Updated Thu, 25 Oct 2012 12:00 PM IST
मथुरा। इस बार भगवान राम के हाथों लंका के राजा रावण के वध की घड़ी धनिष्ठा के आधे नक्षत्रों से लेकर साढ़े चार नक्षत्रों के बीच पड़ी। इस समय को पंचक के नाम से पुकारा जाता है। इस अशुभ घड़ी को दुरुस्त करने के लिए विद्वानों ने उपाय किए। तब कहीं जाकर रावण वध व उसका दाह संस्कार किया गया।
मान्यता है पंचक में मृत्यु प्राप्त करने वाला अपने साथ चार अन्य को भी मौत के मुंह में ले जाता है। इस बार रावण के मरने की घड़ी पंचकों में पड़ी। इस पर विद्वान पंडितों में मंथन करने के बाद इसका तोड़ निकाला।
पंडित अशोक पाठक ने बताया कि धनिष्ठा के आधे नक्षत्रों से लेकर साढ़े चार नक्षत्रों के बीच वध अशुभ माना जाता है। इस प्रकार की घड़ी पहली बार आई है। इस हिसाब से मृत्यु के बाद पांच दिनों तक उसका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता है। ऐसा करने पर अशुभ की आशंका बनी रहती है। पहली बार रावण की मृत्यु का समय पंचक में पड़ने पर चार प्रतीकात्मक पुतले भी तैयार किए गए। इन पुतलों का दहन भी रावण के पुतले के साथ ही कर दिया गया। पंडित अमित शर्मा भारद्वाज ने बताया कि पंचक में मृत्यु के बाद विधि विधान पूर्वक निवारण करने के बाद ही दहन क्रिया होती है। इस बार रावण दहन लीला में ऐसा ही उपाय किया गया।

सेटेलाइट के युग में भी मेले का क्रेज
मथुरा। सेटेलाइट युग में जहां एक ओर लोगों को टीवी ने घरों में कैद कर दिया है। वहीं रामलीला तथा दशहरा मेला को लेकर हर वर्ग के लोगों में आज भी जबरदस्त क्रेज है। महाविद्या में दशहरा मेला में आए बनवारी लाल चतुर्वेदी (75) ने बताया कि दशहरा मेला में कई वर्षों से लगातार आ रहे हैं। बचपन में उनके पिता उन्हें अपने साथ लाते थे। छोटे लाल (65) के कदम भी बड़े उत्साह के साथ मेला स्थल की ओर बढ़े चले जा रहे थे। युवा रसिया चतुर्वेदी (23) अपने दो वर्षीय पुत्र के साथ मेला का आनंद उठा रहे थे। तो आशीष चतुर्वेदी (22) भी अपने परिवार सहित मेला में लगी चाट-पकौड़ी व ऊंट व हाथी सवारी का आनंद उठा रहे थे।

आतिशबाजी से रंगीन हो गया आसमान
मथुरा (ब्यूरो)। महाविद्या के मैदान में आयोजित दशहरा मेला में शिवाकाशी, भरतपुर, दिल्ली की आतिशबाजी से आसमान रंगीन हो उठा। कभी झिलमिल सितारों की जगमगाहट तो कभी तेज रोशनी से सभी की आंखें चुंधिया गईं।

टाइम लाइन
- 4:25 मिनट पर चित्रकूट से भगवान राम की सवारी युद्धभूमि (महाविद्या) की ओर चली।
- 4:45 मिनट पर महाविद्या देवी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
- 5:15 मिनट पर महाविद्या में लीला शुरू हो गई।
- 6:25 मिनट पर पाताल के राजा अहिरावण का वध किया गया।
- 6:35 मिनट पर भगवान राम और रावण की सेनाएं आमने-सामने आ गईं।
- 6:45 मिनट पर भगवान राम और रावण की सेनाओं में घनघोर युद्घ हुआ।
- 7:15 मिनट पर भगवान राम ने रावण का वध कर दिया, पुतला दहन हुआ।

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