स्कूल निर्माण की गुणवत्ता परखने आई टीम

Mathura Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
मथुरा। छाता निर्माण घोटाले के बाद टूटी प्रशासन की नींद का असर दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत किए गए परिषदीय विद्यालयों के निर्माण की गुणवत्ता को परखने के लिए लखनऊ की टीम ने जनपद में डेरा डाल लिया है। 12 सदस्यीय तकनीकी टीम आठ दिनों तक जनपद भर में अभियान के तहत हुए निर्माण कार्यों की जांच करेगी। पहले ही दिन से टीम ने जांच शुरू कर दह है।
सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक अतुल कुमार द्वारा जनपद के लिए भेजी गई 12 सदस्यीय तकनीकी टीम का नेतृत्व वरिष्ठ विशेषज्ञ परियोजना कार्यालय आशुतोष गौड़ और डा. राजीव गोहित कर रहे हैं। तकनीकी टीम में शामिल 10 सदस्य परियोजना से जुडे़ सिविल इंजीनियर हैं, जो निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांचेंगे। दोनों ही अधिकारियों ने पांच-पांच सदस्यों के साथ शुक्रवार को अलग-अलग ब्लॉक में विद्यालयों के निर्माण की टोह ली। यह टीम आठ दिन तक यहां रहकर जांच करेगी।
गौरतलब है कि पिछले साल छाता ब्लॉक में सामने आए करीब तीन करोड़ के निर्माण घोटाले के चलते यह टीम जनपद भ्रमण पर है। इस घोटाले में बगैर निर्माण के ही शासन को निर्माण होने की रिपोर्ट भेज दी गई। इसमें बाउंड्रीवाल के 55 लाख का तो अब तक पता नहीं है। हालांकि इस मामले में पांच आरोपी बनाए गए हैं।

खस्ता है ज्यादातर विद्यालयों की स्थिति
मथुरा। बेसिक शिक्षा में एक दशक के दौरान जनपद में बनाए गए सैकड़ों विद्यालयों की हालत खस्ता है। डीपीईपी और सर्व शिक्षा में हुए निर्माण की गुणवत्ता बेहद घटिया है। यही कारण है कुछ साल पहले बने विद्यालय ही जर्जर हो चले हैं। छतों से पानी टपकता है। दीवारों में दरार आ गई हैं।

शिक्षक बने ठेकेदार
मथुरा। शिक्षाधिकारियों ने जनपद में शिक्षकों को निर्माण ठेकेदार बना दिया। एक-एक शिक्षक सेे कई-कई विद्यालयों का निर्माण कराया गया। अधिकारियों के चहेते कई शिक्षक तो पढ़ाई छोड़ निर्माण कराने में ही जुटे रहे। छाता ब्लॉक का निर्माण घोटाला इसी की परिणति है।

बीएसए आफिस सभागार में भी दरार
मथुरा। सर्व शिक्षा में हुए निर्माण की गुणवत्ता का आंकलन बीएसए आफिस में बने सभागार की गुणवत्ता को देखकर ही सहज लगाया जा सकता है। वर्तमान में साक्षरता अभियान और बैठक सभागार के लिए उपयोग किया जा रहे इस हॉल में दरार आ गई हैं।

कई बार हुए हैं हादसे
मथुरा। निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने के कारण जनपद में कई हादसे हुए। नंदगांव, फरह सहित कई ब्लॉक में विद्यालयों की निर्माणाधीन छत गिरी। कई विद्यालयों की बाउंड्रीवाल धराशायी हो गई। हाल ही में फरह ब्लॉक में ही विद्यालय की छत गिरी है। ऐसे मामलों की जांच भी हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्माण प्रभारी, ग्राम प्रधान और एबीएसए से वसूली के आदेश भी हुए, लेकिन इन आदेशों पर अमल नहीं हुआ।

गाटर से बना दीं छत
मथुरा। सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत विद्यालयों के निर्माण के दौरान छत लेंटर से बनाना तय है, लेकिन कई ब्लॉक में इस प्रावधान की धज्जियां उड़ा दी गई हैं। खासकर फरह ब्लॉक में लेंटर के स्थान पर नवीन विद्यालय और अतिरिक्त कक्षा कक्षों का पटाव गाटर पटिया से किया गया है। दोनों की लागत में बड़ा अंतर है।
‘हां, राज्य परियोजना कार्यालय से निर्माण जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम आ चुकी है। टीम ने जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है’
- श्याम प्रकाश यादव, बीएसए मथुरा

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