सत्संग भवन की इमारत ढही, मिस्त्री की मौत

Mathura Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
फरह। गांव किरारई में सत्संग भवन की तीसरी मंजिल ढह गई। मलबे में दबकर दूसरी मंजिल पर सो रहे राजमिस्त्री की मौत हो गई। 20 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में मिस्त्री के शव को निकाला गया। एसडीएम ने चार मंजिला इमारत कैसे बनाई जा रही थी इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। घटना बुधवार रात की है।
गांव किरारई में हरनाम बाबा के सत्संग मंदिर की चौथी मंजिल का निर्माण चल रहा था। बताया गया कि निर्माण कराने के लिए बाबा ने तीसरी मंजिल पर एक ट्राली गिट्टी, एक ट्राली बजरी और पत्थर आदि सामान रखवा दिया। दूसरी मंजिल पर बुधवार की रात काम करने के बाद गांव शहजादपुर, कीकर थाना नूरपुर बिजनौर निवासी राजमिस्त्री बाबू सिंह सोया हुआ था। रात में करीब नौ बजे सत्संग भवन की तीसरी मंजिल गिर पड़ी। जिस समय यह दुर्घटना हुई उस समय बराबर में बने आठ मंजिला सत्संग भवन में सत्संग चल रहा था। सत्संग करने वाले तुरंत वहां से इस ओर दौड़े। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्रित हो गए।
ग्रामीणों को जब इस बात का पता लगा कि भवन के मलबे में एक व्यक्ति दब गया है। ग्रामीण उसे निकालने में जुट गए। बाबा ने जेसीबी से मलबे को हटाकर मलबे में दबे मिस्त्री बाबू सिंह को निकालने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। गुरुवार की सुबह एसओ फरह भी मौके पर पहुंच गए। इस बीच राज मिस्त्री के परिजन भी बिजनौर से घटनास्थल पर पहुंच गए। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और एसडीएम सदर हवलदार सिंह यादव पहुंचे और जेसीबी से मलबे को हटवाया गया। शाम करीब पांच बजे राज मिस्त्री का शव निकल सका। मामले में एसडीएम सदर ने जांच के आदेश दिए हैं कि सत्संग भवन बिना पिलर के इतना ऊंचा कैसे बनाया जा रहा था।
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पुलिस की गाड़ी के आगे लेट गए परिजन
फरह। मलबे से बाबू सिंह का शव निकलने पर परिजनों ने उसे पुलिस से छीनने का प्रयास किया। उनका कहना था कि उन्हें पोस्टमार्टम नहीं कराना है। परिवार के लोगों की पुलिस से काफी झड़प हुई। परिवार के लोग गाड़ी के आगे तक लेट गए। बाद में काफी समझाने के बाद परिजनों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जाने दिया।
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बाबा के तीन पुत्र भी लगे हुए सत्संग में
हरनाम बाबा के तीन जगमोहन, हेतराम और डोरी श्याम भी उनके साथ सत्संग के इस व्यवसाय में लगे हैं। उनके पास सत्संग के अलावा कोई काम नहीं है।
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तो हो जाता और बड़ा हादसा
फरह। किरारई के ग्रामीणों का कहना है कि बाबा के यहां सत्संग के लिए काफी दूर दराज से श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं। अगर यह दुर्घटना सत्संग के दौरान होती एक बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि बाबा के दुर्घटनाग्रस्त होने वालेे सत्संग भवन के बराबर में इसी तरह की आठ मंजिला मंदिर बना रखा है, जहां सत्संग होता है।

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