कान्हा से फिर ‘कालिया मर्दन’ की मनुहार

Mathura Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
द्वापर में कालिया नाग ने अपने विष से यमुना को विषैला कर दिया था। उस समय कान्हा ने कालिया मर्दन कर जल पीने योग्य बनाया था। एक बार फिर यही संकट आन पड़ा है। कान्हा की नगरी में सिक्कों की भूख और शिथिलता के चलते अधिकारी जननी यानी धरती मां और जीवनदायिनी यानी मां यमुना दोनों को सीवर रूपी विष से तिल-तिल मरता देख रहे हैं। वहीं धन के लोभी बिल्डर कालिया नाग की भांति जीवनदायिनी और जननी की कोख को विषैला करने में जुटे हैं। ऐसे में दोनों एक बार फिर श्रीकृष्ण से कालिया मर्दन करने की मनुहार कर रही हैं।

मथुरा। विकास प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गफलत के चलते पर्यावरण अधिनियम की धज्जियां उड़ रही हैं। नियमों को ताक पर रखकर टाउनशिप, कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। इनमें एसटीपी न होने के चलते नालों के सहारे सीवर सीधा यमुना में या फिर धरती की कोख में गिर रहा है।
अगर यमुना के प्रदूषण को अफसरों क ी लापरवाही की देन कहें तो अतिशयोक्ति न होगी। अधिकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना फाइलों में दब कर रह गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को मानचित्र से पूर्व बोर्ड को एनओसी संबंधी पत्र लिख कर कर्तव्यों को पूरा कर लिया। जब कभी दबाव पड़ा तो कॉलोनाइजर, कॉलेज संचालकों को नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर ली गई। इधर, विकास प्राधिकरण के अधिकारी वन एवं पर्यावरण की अधिसूचना तथा कॉलोनियों, टाउनशिपों में एसटीपी संबधी किसी शासनादेश से अनजान हैं। इसका खामियाजा प्रदूषण से कराह रही यमुना को भुगतना पड़ रहा है।

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जारी की थी अधिसूचना
14 सितंबर 2006 को जारी अधिसूचना में आदेश दिए गए कि मथुरा में सभी भवन निर्माण, भूमि विकास प्रोजेक्ट हेतु जो 20,000 वर्ग मीटर अधिक कवर्ड एरिया और 1.5 लाख वर्ग मीटर से अधिक बिल्डअप एरिया की टाउनशिप एवं भूमि विकास परियोजनाओं हेतु पर्यावरण अनुमति अनिवार्य है। इसकेे अलावा इससे कम क्षेत्रफल वाले भवनों को कभी प्रदूषण बोर्ड से अनापत्ति लेना अनिवार्य बताया गया। इस बाबत प्रदूषण बोर्ड ने विप्रा को उक्त आदेश के अनुपालन में नक्शा स्वीकृत करने से पूर्व बोर्ड की एनओसी को पत्र लिखे। बावजूद इसकेे लापरवाही का सिलसिला आज तक बदस्तूर जारी है।

शासनादेश से अनजान बन रहा विप्रा
मथुरा। आरटीआई कार्यकर्ताओं की सामाजिक संस्था ‘परिवर्तन’ के लीगल एडवाइजर गौरव अग्रवाल द्वारा मांगी गई सूचनाओं में विप्रा के जनसूचना अधिकारी ने अवगत कराया है कि टाउनशिप, कालोनियों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए कोई शासनादेश उपलब्ध नहीं है।

200 कॉलोनियों मेें एसटीपी नहीं!
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में चार दर्जन कॉलोनी और एक दर्जन से अधिक कॉलेज (हॉस्टल संचालित) में एसटीपी का संचालन नहीं हो रहा है। अफसर इन संचालकों को नोटिस भेजकर कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं। हकीकत में ऐसी कॉलोनियों की संख्या 200 तथा दो दर्जन से अधिक कॉलेज बताए जाते हैं।

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