कालिंदी में उड़ेली जा रही शहर की ‘कालिख’

Mathura Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
मथुरा। नालों का गंदा पानी सीधे यमुना में गिर रहा है। ये कालिख रूपी गंदगी यमुना की पवित्रता को मैला कर रही है। भक्तउद्वेलित हैं और लगातार आंदोलन कर रहे हैं तो न्यायालय भी सख्त है। बावजूद इसके अफसर बेपरवाह हैं।
करोड़ों लोगोें की आस्था का केंद्र यमुना में प्रदूषण दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। हाल ये है कि पालिका प्रशासन द्वारा तैयार किए गए आंकड़े भी यमुना में बढ़ते प्रदूषण की ही गाथा गा रहे हैं। मसानी, वृंदावन गेट, बंगाली घाट, स्वामी घाट, डेरी फार्म व कैं ट नाले पर बने पंपिंग स्टेशनों की क्षमता मात्र 49.09 एमएलडी है। यह स्थिति तब है जब 20 घंटे पंपिंग की जाए। इसके अलावा इन पंपों से निकलने वाले पानी को शोधित करने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता मात्र 28 एमएलडी है। जो कुल उत्सर्जित 71.37 एमएलडी जल के सापेक्ष 43.37 एमएलडी कम है।


सीवेज पंपिंग स्टेशन जल की आमद डिस्चार्ज एसटीपी की क्षमता
मसानी+वृंदावन गेट 31.06 एमएलडी 21.06 13.59 एमएलडी
बंगाली घाट+स्वामी घाट 17.96 एमएलडी 13.96 -
डेरी फार्म+कैंट नाला 21.53 एमएलडी 13.53 14.5 एमएलडी

चेयरमैन व ईओ के जारी हो चुके वारंट
मथुरा (ब्यूरो)। पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन में पालिका प्रशासन हद दर्जे का लापरवाह है। बीते वर्ष यमुना भक्तों के आंदोलन का दबाव बढ़ा तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी गर्दन बचाने के लिए न्यायालय की शरण ली। इस बावत लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने चेयरमैन, ईओ के गैरजमानती वारंट भी जारी किया। बावजूद इसके हालात जस के तस बने हैं।

राल ड्रेन का पानी भी करता बढ़ा रहा गंदगी
मथुरा (ब्यूरो)। यमुना कार्ययोजना की बैठक में राल ड्रेन के गंदे पानी के ओवर फ्लो होने के बाद गणेशरा नाले के माध्यम ये गंदा पानी सीधे यमुना में गिरता है। उक्त मामला सिंचाई विभाग और पालिका प्रशासन में उलझ जाता है। जिसका खामियाजा यमुना को और मैली होकर भुगतना पड़ता है।

भविष्य की योजना भी नाकाफी
मथुरा (ब्यूरो)। शहर के उत्सर्जित जल को शोधित करने के लिए पालिका प्रशासन द्वारा 16 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यमुना पार तैयार करवाया जा रहा है। उक्त एसटीपी के बनने के बाद भी कुल क्षमता 42 एमएलडी हो जाएगी। जबकि वर्तमान में ही 71 एमएलडी पानी उत्सर्जित हो रहा है। ऐसे में अफसरों की अदूरदर्शिता का दंड प्रदूषण के रूप में यमुना को भुगतना होगा।

कहां से कितना उत्सर्जन
85 नलकूप...................................29.37 एमएलडी
एक हजार हैंडपंप..........................01 एमएलडी
गोकुल बैराज................................13 एमएलडी
सबमर्सिबिल...................................18 एमएलडी
रेलवे, इंडस्ट्रीज.............................10 एमएलडी
--------------------------------------
कुल 71.37 एमएलडी


‘एसटीपी की क्षमता से तीन गुना अधिक पानी का उत्सर्जन हो रहा है। जिसे शोधित करना संभव नहीं हो पा रहा है।’
- अनिल कुमार
अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका मथुरा।

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