जिले की बेसिक शिक्षा बदहाल

Mathura Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
मथुरा। जिले की बेसिक शिक्षा की स्थिति दयनीय है। यहां डेढ़ हजार से ज्यादा शिक्षकों का टोटा है। आलम यह है कि किसी विद्यालय में एक-एक शिक्षक है तो कहीं एक-एक के भी लाले हैं। वहीं अनेक विद्यालय ऐसे भी हैं जहां शिक्षकों की भरमार है। इससे विभाग में व्याप्त अनियमितताओं का सहज ही अंदाजा लगाया सा सकता है।
अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत 40 छात्रों पर एक शिक्षक की अनिवार्यता है, लेकिन शिक्षक और छात्रों के अनुपात का ये कालम जनपद में पूरा नहीं हो रहा। जिले में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या करीब 1306 है, तो उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या करीब 600 है। इनमें 4400 शिक्षक तैनात हैं, जबकि स्वीकृत पदों की संख्या 6000 के करीब बताई जा रही है। इस तरह 1500 से ज्यादा शिक्षकों की जनपद में कमी है। यहां 377 विद्यालय तो ऐसे हैं जहां एक-एक शिक्षक ही कार्यरत हैं। इसमें करीब 180 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें छात्रों की संख्या भी 70 से ज्यादा है, फिर भी एक ही शिक्षक एक से कक्षा पांच तक की पढ़ाई का कालम पूरा कर रहा है।
जिले को मिले 257 और शिक्षक
अंतर्जनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया में जिले को 257 शिक्षक और मिल गए हैं। इससे अगले सप्ताह एकल और बंद विद्यालयों की संख्या में कमी आ जाएगी। गुरुवार को इसके पद स्थापन के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।
समायोजन की जरूरत
मथुरा। जिले को समायोजन का इंतजार है। इसके अभाव में कहीं जरूरत से ज्यादा शिक्षक मौजूद हैं तो कहीं पर एक भी मौजूद नहीं है। हालांकि शासन ने समायोजन का आदेश दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि तक जिला बेसिक शिक्षाधिकारी इसमें नाकाम हो गए।
हर विद्यालय में चाहिए विज्ञान शिक्षक
मथुरा। अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक विज्ञान शिक्षक की अनिवार्यता की गई है। हाल ही में शासन ने भी इसे प्रभावी बनाने के लिए आदेश जारी किया था, लेकिन जनपद में ये प्रभावी नहीं हो सका। इसके कारण जनपद में किसी विद्यालय में कला वर्ग के शिक्षकों की भरमार है तो कहीं विज्ञान शिक्षक बहुतायत में हैं।
पीटीआई उड़ा रहे व्यवस्था की खिल्ली
मथुरा। जनपद में तैनात पीटीआटी व्यवस्था की खिल्ली उड़ा रहे हैं। शासन की व्यवस्था के तहत इन्हें 10 दिन खेलकूद गतिविधियों से जुड़ना है बाकी 20 दिन मूल विद्यालय में पढ़ाई करानी है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। पीटीआई और स्काउट गाइड के मायने जनपद में स्कूल से छुट्टी बन गई है।
स्कूल नहीं जाते शिक्षक नेता
मथुरा। जनपद में ऐसे शिक्षक नेताओं की संख्या यकायक बढ़ गई है जो आजकल विद्यालय में पढ़ाने नहीं जा रहे हैं। यह शिक्षक नेता या तो बीएसए और एबीएसए कार्यालय के आसपास देखे जा सकते हैं या फिर उन्हें प्रशासनिक दफ्तरों में देखा जा सकता है। इतना ही नहीं, इन्हें देखते हुए अन्य बहुतायत में शिक्षक स्कूल में पढ़ाने नहीं जा रहे हैं।

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