रोज चट कर रहे दस लाख का गुटखा

Mathura Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
मथुरा। तंबाकू जानलेवा है...। इस वैधानिक चेतावनी को देखककर भी तलबगार मानते ही नहीं। इसी का नतीजा है कि लाख चेतावनियों के बावजूद यहां प्रतिदिन दस लाख रुपये का गुटखा लोग चट कर जाते हैं। इसके अलावा तंबाकू (खैनी) की भी प्रतिदिन एक लाख रुपये की खपत है। गुटखा बंद होने की आहट मात्र से ही इसके तलबगार गुटखा स्टॉक भी करने लगे थे। शहर में तंबाकू और विभिन्न ब्रांडों के गुटखा बिक्री करने वाले दुकानदारों के अनुसार एक जमाने में शहर में सबसे ज्यादा बिकने वाली मैनपुरी तंबाकू के दिन अब बुरे हैं। कभी इसकी जबर्दस्त खपत थी लेकिन अब इसकी खपत हर दिन औसतन पांच हजार रुपये पर सिमट कर रह गई है।
शहर में सबसे अधिक बिकने वाले खैनी ब्रांडों की बिक्री प्रतिदिन 80 हजार रुपये है। इनके अलावा कई अन्य ब्रांड के तंबाकू भी बिक रहे हैं। खुला तंबाकू भी बिक रहा है। इस तरह करीब एक लाख रुपये रोज का तंबाकू बिक रहा है। जनपद में करीब दस लाख रुपये का गुटखा रोज बिक्री हो रहा है।
और बढ़ गया गुटखे का चलन
गुटखा का प्रचलन समाज में तेजी से बढ़ने का कारण तलबगारों ने कुछ इस तरह बताया। एक तो गुटखा हर स्थान पर गली और मोहल्ले की दुकानों पर आसानी से मिल जाता है। दूसरा इसकी कीमत एक रुपया होने के कारण खाने वालों को सस्ता लगता है। पान लगवाने में लगे वक्त से बचने के लिए भी गुटखे को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन पुरानी पीढ़ी के लोग ही खैनी ही खा रहे हैं। दस साल में महंगाई का ग्राफ कहीं से कहीं पहुंच गया। इसके बावजूद भी गुटखा की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। दस साल पहले भी एक रुपये का बिकने वाला गुटखा आज भी बाजार में एक रुपये का बिक रहा है।

अप्रैल तक कैंसर को अभयदान!
मथुरा। सरकार के निर्णय ने प्रदेश में कैंसर को एक अप्रैल 2013 तक के लिए अभयदान दे दिया है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद गुटखे की बिक्री बेमानी है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
अपर निदेशक स्वास्थ्य के पद से सेवानिवृत्त डा. सीएम मवार लोगों के स्वास्थ्य के प्रति उच्च न्यायालय के रुख को जनहित का बताते हैं। उनका कहना है गुटखे पर तत्काल प्रतिबंध लगना चाहिए।
वरिष्ठ क्रिकेटर और खेल एसोसिएशन से जुड़े कमल चावला का कहना है गुटखा नई पीढ़ी में घुन लगा रहा है। ऐसे में खिलाड़ियों की नई पौध कहां से निकलेगी। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में गुटखा बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगना चाहिए था। रतन लाल फूलकटोरी देवी कन्या विद्यालय की प्राचार्य डा. नीता सिंह सामाजिक दृष्टिकोण से गुटखा की बिक्री तत्काल बंद करने की बात कहती हैं। उन्होंने कहा देश में 14 राज्यों इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाकर मिसाल कायम की है। युवा उद्यमी प्रतुल अग्रवाल ‘अलंकार’ सरकार के इस निर्णय को उद्यमियों के लिये राहत भरा बताते हैं। सरकार ने व्यापारियों को स्टॉक खत्म करने के लिए पर्याप्त समय दिया है लेकिन आम लोगों के स्वास्थ्य के नजरिया से देखा जाए तो उक्त निर्णय निराशाजनक है।

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