ओ मई गॉड के विरोध में प्रदर्शन फिल्म पर रोक

Mathura Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
मथुरा। ओह माई गॉड फिल्म में भगवान एवं धर्माचार्यो के गलत चित्रण के विरोध में रविवार को संत और धर्माचार्यो के साथ विप्र समाज भी सड़कों पर आ गया। कलक्ट्रेट पर नारे और प्रदर्शन के बीच पुतला दहन किया। बाद में सभी लोग जिलाधिकारी आवास पर पहुंचे और तत्काल फिल्म का प्रदर्शन बंद करने की मांग की।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व भागवताचार्य ठाकुर देवकी नंदन ठाकुर, स्वामी महेशानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर फूलडोल महाराज, ब्राह्मण समाज के नेता और पूर्व चेयरमैन कमलकांत उपमन्यु, हरिदास संगीत समारोह समिति के सचिव गोपी गोस्वामी आदि ने किया। प्रशासन ने संतो के विरोध को देखते हुए फिल्म के सभी शो बंद करा दिए। सिनेमा संचालकों ने भी आम लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि वे भी समाज के साथ हैं।
गत दिवस ओह माई गौड का प्रदर्शन देश भर के साथ जनपद के सिनेमा घरों में भी हुआ। फिल्म के शो देखने के बाद आम जनता में काफी तीखी प्रतिक्रिया हुई। हिंदू धर्माचार्यो और देवों पर टिप्पणी व गलत फिल्मांकन का मामला संत समाज तक पहुंचा तो सरगर्मी होने लगीं। भागवताचार्य देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि फिल्म में जिस तरह हिंदू धर्म और संस्कृति का मजाक उड़ाया गया।
कलक्ट्रेट पर जुटे धर्माचार्यो संतों और ब्राह्मण समाज के लोगों ने फिल्म के विरोध में तख्ती और पुतला लेकर प्रदर्शन किया और पुतला फूंका। विरोध प्रदर्शन के दौरान मनोज चतुर्वेदी, श्यामसुंदर शर्मा, विजय शर्मा आदि प्रमुख थे।

अब चुप नहीं बैठेंगे- महेशानंद सरस्वती
मथुरा। हिंदू संस्कृति सदैव सभी धर्मो और उनके मानने वालों का प्रश्रय देती रही है। ऐसे में हिंदुओं और हिंदू धर्म पर समय समय पर वैचारिक हमले भी होते रहे हैं। हिंदुओं की सहिष्णुता का नाजायज फायदा उठाते हुए कोई भी हिंदुओं और हिंदू धर्म पर ऊल जलूल टिप्पड़ी कर देताहै। इसे अब सहन नहीं किया जाएगा। एसे हमलों का जवाब दिया जाएगा।

वैचारिक युद्ध में नहीं तोड़ सकते हमें -फूलडोल जी महाराज
मथुरा। हिंदू देवी देवताओं और धर्माचार्योकी आन-बान-शान का मजाक अब सहन नहीं होगा। ओ माई गॉड फिल्म में हिंदू देवताओं और धर्माचार्यो का मजाक उड़ाते हुए उनकी श्रद्धा और सम्मान के विपरीत जो चित्रण किया गया है वह अत्यंत व्यिथित कने वाला है। मजबूत आत्मबल वाले हिंदूओं कोवैचारिक युद्ध में आज तक कोई पराजित नहीं कर पाया है।

किसी की भावना को न पहुंचे ठेस- कमलकांत उपमन्यु
मथुरा। फिल्म निर्माता निर्देशकों को फिल्म के निर्माण करते समय फिल्म के चित्रणों के दौरान एवं संवादों को गहनता से देखना चाहिए और यह ध्यान रखना चाहिए कि फिल्म को रोचक बनाने में किसी भी शो धर्म संस्ककृति या संप्रदाय की भावना को ठेक न पहुंचे।

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