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परखम में हाहाकार, बेकाबू बुखार

Mathura Updated Fri, 14 Sep 2012 12:00 PM IST
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मथुरा/फरह। फरह के गांव परखम में हाहाकार मच गया है। गुरुवार को बुखार से पीड़ित 80 वर्षीय वृद्ध शिवराम ने भी दम तोड़ दिया। दिनभर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने हालातों का जायजा लिया। विकासखंड अधिकारी ने पीड़ित लोगों से मुलाकात की। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दोपहर दो बजे ग्रामीणों से यह कह कर वापस चले गए कि दवा चाहिए तो फरह स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर आ जाएं।
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परखम गांव में पिछले दो दिन में बुखार से सात मौतों के बाद गुरुवार को एक और वृद्ध बुखार की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों का कहना है गांव में मच्छरों के चलते वायरल, मलेरिया तेजी से फैल रहा है। इधर, बुखार से मौत की खबरों के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सकों की टीम भी गांव पहुंची। गांव में हर घर में कोई न कोई वायरल और मलेरिया बुखार से पीड़ित है।
गुरुवार को बीडीओ शशिबाला श्रीवास्तव पटवारी और कानूनगो के साथ, मुख्यालय से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. बीएस यादव के नेतृत्व में एसीएमओ डा. दिलीप कुमार, डिप्टी सीएमओ सुकेश गुप्ता और फरह सीएचसी प्रभारी डा. रविंद्र गुप्ता की टीमों ने मरीजों का परीक्षण किया। बीडीओ शशिबाला ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की, बीमारों का हाल जाना। फरह चिकित्सा प्रभारी डा. आरके गुप्ता ने बताया गांव परखम, मीरपुर और मुस्तफाबाद में 217 रोगियों का परीक्षण कर दवाएं दी गयी हैं। वहीं 63 मरीजों की स्लाइड बनाकर परीक्षण किया गया है। हालांकि उन्होंने लोगों की मौत बुखार से होने की बात से इंकार करते हुए अन्य कारण गिनाए। जबकि अभी भी बहुत से ग्रामीण बुखार से पीड़ित हैं। वहीं ग्राम प्रधान वासुदेव का कहना है कि टीम सुबह 10 बजे गांव पहुंची थी और दोपहर दो बजे वापस चली गई। वहां मौजूद ग्रामीणों से कह दिया कि दवा चाहिए तो फरह स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंच जाएं।

आंसू मांग रहे ‘भगवान’ से जवाब...
फरह (ब्यूरो)। ये धरती के भगवान हैं और जिंदगी इनके दम पर कई बार बचती है, लेकिन परखम में जो हुआ उसके बाद हर आंख में आंसू हैं। यही आंसू अब धरती के भगवान कहे जाने वाले डाक्टरों से जवाब मांग रहे हैं। परखम रो रहा है। यहां के हर मोड़ पर चीख पुकार साफ सुनाई देती है। लेकिन इसके पीछे का दर्द है कि समय रहते चिकित्सा विभाग की टीम नहीं पहुंची।
रूमाली के परिजन मेघश्याम ने बताया कि गांव में बुखार के चलते लोग तड़प रहे हैं। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचित किया गया। लेकिन समय रहते कोई मदद नहीं मिली। इसके चलते अपनों को खोना पड़ा। यही हाल रामवती को खोने वाले ज्ञान, मेघाराम के भाई रघुवीर, वैजयंती के परिजन बिजेंद्र, राधेश्याम के पाती, सकीना के पिता शकील का था।

दवा का छिड़काव नहीं...
फरह (ब्यूरो)। ग्रामीण डूंगर सिंह, भरतो, गोविंदा, नीरज आदि का कहना था कि गांव में मच्छरों का प्रकोप है। हर बार मलेरिया कर्मी और स्वास्थ्य विभाग की टीम भ्रमण कर दवा छिड़काव करवाती थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते बुखार ने पैर पसार लिये। पिछले पंद्रह दिनों से ग्रामीण बुखार से जूझ रहे थे। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इस देखने की भी जेहमत नहीं उठायी।

बुखार से पीड़ितों की कतार
फरह (ब्यूरो)। गांव परखम में मदन सिंह, विजय सिंह, राजकुमारी, प्रेम देवी, हरदेवी, बत्ता, भीम सिंह, मुकेश, संता, जगदीश, मुन्नी, संतो, रनवीर सहित एक सैंकड़ा से अधिक लोग बीमारी से पीड़ित है।

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