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मरहम का वादा पर घाव खुला छोड़ दिया

ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी Updated Tue, 07 Apr 2015 10:48 PM IST
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On the promise of healing the wounds left open

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बर्बादी का वह भयानक मंजर अभी किसानों की आंखों में तैर रहा है। अपने सामने अपनी फसलों का बर्बाद होता देखा मगर कुछ कर न सका। बारिश की हर बूंद के साथ उम्मीदों के ढेर बह गए, सपनों के आशिया बिखर गए और दम तोड़ गई वह किरण जिससे रोशनी की तमन्ना थी। ‘तबाही का तूफान’ अपने साथ वो तमाम कुछ उड़ा ले गया जिससे अरमान सजाए थे। तूफान थमा तो चारो ओर अंधेरा, सरकार की घोषणाओं ने उम्मीद जगाई लेकिन बस वे घोषणाएं मंच तक सिमट गई। सूबे के मुखिया ने मरहम का वादा तो किया लेकिन घाव खुला छोड़ दिया। अब यह खुला घाव दिन पर दिन नासूर बनता जा रहा है लेकिन इलाज के नाम पर महज वादे ही वादे। बर्बादी से अब तक अन्नदाता इतने आंसू बहा चुका है कि उनकी भरपाई शायद ही कोई कर सके। अब फसल और खेतों को देखकर आंखें आंसू नहीं बहाती मगर दिल में दर्द का दरिया खलबली मचाए है। गुजरा समय भुलाया नहीं जा रहा और भविष्य की चिंता जीने नहीं दे रही। आखिर अन्नदाता अब किस राह जाए यह विधाता ही बता सकता है। सरकार से इमदाद की दरकार में अब तक जिले के 11 किसान जान गवां चुके हैं। प्रशासन का हाल यह है कि अब तक नुकसान का सर्वे तक नहीं करा सका है। राजस्व कर्मियों पर घर बैठकर क्षति का आंकलन करने के आरोप लग रहे हैं।
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एक और किसान की सदमे में कई जान
मैनपुरी। औंछा क्षेत्र के ग्राम सुल्तानपुर निवासी किसान राजेंद्र बघेल सोमवार की शाम खेत में पककर तैयार गेहूं की फसल की कटाई करने गए थे। खेत में पूरी तरह गिर चुकी गेहूं की फसल और उसमें दाना बेहद कम निकलता देख उन्हें ऐसा सदमा लगा कि खेत पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। अचानक खेत में ही राजेंद्र की मौत होते देख पत्नी ऊषा देवी और बच्चे घबरा गए और रोने लगे। किसानों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर तहसील कर्मियों ने पहुंचकर जानकारी जुटाई और पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। राजेंद्र बघेल के नाम 10 बीघा जमीन है। इसी से परिवार का भरण पोषण होता है। खरीफ में उनकी धान की पूरी फसल सूखे की भेंट चढ़ गई थी। गेहूं की फसल से उम्मीद थी कि घाटा पूरा हो जाएगा लेकिन बारिश और तेज हवाओं ने गेहूं की फसल भी चौपट कर दी। पत्नी ऊषा का कहना है कि पति के निधन के बाद वह चार बच्चों को कैसे पालेगी।

अब तक हुई 11 किसानों की हुई मौत
तीन अप्रैल: अंडनी निवासी सुरेश चंद्र की सदमे से मौत।
तीन अप्रैल: ग्राम अड़ूपुर के किसान निहाल सिंह ने फांसी लगाकर जान दी।
एक अप्रैल: मुगलपुर के राधेश्याम शाक्य ने सदमे में खेत पर दम तोड़ा।
एक अप्रैल: गढ़िया गोविंदपुर के किसान राजपाल लोधी की सदमे से मौत।
24 मार्च: ग्राम बोझिया में धनीराम ने खेत पर फांसी लगाकर आत्महत्या की।
24 मार्च: बिछवां के किसान रामकिशन की सदमे से मौत।
20 मार्च: ग्राम बूरामई के किसान श्रीचंद्र की सदमे से मौत।
17 मार्च: घरनाजपुर के रामवीर सिंह की सदमे से मौत।
15 मार्च: कांकन के राजेंद्र शाक्य ने फांसी लगाकर जान दी।
14 मार्च: ग्राम औरंगाबाद के रोहन सिंह की खेत पर सदमे से मौत।
(अब तक इनमें से किसी किसान के परिवार को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिली है।)

तीन परिवारों को मिले पांच-पांच लाख
आंधी और बारिश से दीवार गिरने से मलबे में दबकर दो किसानों की हुई मौत एवं बिजली गिरने से एक की मौत के मामले में दैवीय आपदा कोष से पीड़ित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। मंछना के रामदास की 15 मार्च को बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई थी। तीन अप्रैल को आंधी और बारिश से नूरमपुर के सुखराम और कछपुरा शमशेरगंज के अनोखेलाल की दीवार गिरने से मौत हो गई थी। इन तीनों ही परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये के चेक दिए गए हैं।

कैसे पालेगी तीन बच्चों को अनीता
बरनाहल। फसलें तबाह होने से जिन किसानों की मौत हुई हैं उनके घरों से अभी भी उठ रहे करुण क्र्रंदन से लोगों की आंखें नम हो रहीं हैं। क्षेत्र के ग्राम बोझिया में धनीराम यादव के टूटे-फूटे छप्पर रखे घर से अभी भी पत्नी अनीता देवी की रह-रहकर उठने वाली रोने की आवाजें ग्रामीणों की आंखों में आंसू ला देती हैं। तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठने का गम अनीता देवी बर्दाश्त नहीं कर पा रहीं हैं। पति द्वारा लिए गए कर्ज को अदा करने और फसल बर्बाद होने से बच्चों को पालने की चिंता ने उन्हें गुमसुम सा कर दिया है। धनीराम की बूढ़ी मां रामकुंअर जवान बेटे की मौत से ऐसे सदमे में आ गईं हैं कि बोलना ही छोड़ दिया है। किसी प्रकार की सरकारी मदद न मिल पाने की दशा में गांव के लोगों की मदद से खाने-पीने की व्यवस्था हो रही है। लेकिन कब तक ऐसे ही चलेगा यह सोचकर अनीता देवी सिहर उठती हैं। वह बताती हैं कि  एसडीएम साहब आए थे और जल्द ही आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिला गए थे। धनीराम के  बड़े बेटे प्रदीप ने घर को चलाने के लिए मजदूरी शुरू कर दी है। अब अमरदीप और कुलदीप की पढ़ाई पर भी संकट गहराता नजर आ रहा है।

858 में से 252 गांवों का ही हो सका सर्वे
प्रदेश के अन्य जिलों में जहां तबाह फसलों के लिए मुआवजा देने के लिए बजट की मांग की गई है और कई जिलों में मुआवजे की राशि वितरित होने लगी है। वहीं जिला प्रशासन अब तक नुकसान का सर्वे ही नहीं करा सका है। जिले के 858 ग्रामों में से लेखपाल महज 252 गांवों में ही फसलों के नुकसान का सर्वे कर रिपोर्ट दे सके हैं।

एसडीएम और तहसीलदार करेंगे सत्यापन
50 से अधिक गांवों के किसानों ने लेखपालों पर घर पर ही बैठकर सर्वे करने के आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिए हैं। किसानों की शिकायत पर प्रशासन ने लेखपालों की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद एसडीएम और तहसीलदारों से सत्यापन कराए जाने का निर्णय लिया है। एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन ग्रामों से शिकायतें मिली हैं उनमें मौके पर जाकर क्षति का आंकलन किया जाए। मंगलवार से ही सत्यापन का कार्य शुरू करा दिया गया है।

लेखपालों को नुकसान का सर्वे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। दो दिन के अंदर सर्वे और सत्यापन का कार्य पूरा करा लिया जाएगा। नौ अप्रैल को सर्वे और सत्यापन की डीएम की अध्यक्षता में समीक्षा की जाएगी। नौ अप्रैल की रात तक  क्षति के आंकलन की रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
                                                     डाक्टर चंद्रभूषण, एडीएम

बड़े उम्मीदों के साथ 15 बीघा खेत में गेहूं की फसल पैदा थी। फसल भी अच्छी थी। सोचा था कि गेहूं की फसल से सूखे से हुआ घाटा पूरो हो जाएगा। लेकिन 50 फीसदी से अधिक गेहूं मौसम की भेंट चढ़ गया है। अब तक नुकसान का सर्वे करने कोई राजस्व कर्मी भी नहीं आया है। ऐसे हालातों में लागत भी निकलती नजर नहीं आ रही है।
                               किसान रामकुमार, अंबरपुर

बेमौसम की बारिश और आंधी ने 70 प्रतिशत गेहूं की फसल नष्ट कर दी है। जो फसल बची भी है तो उसमें दाने बेहद कम हैं। ऐसे में गेहूं की फसल से लागत भी नहीं निकलेगी। इतने दिन बीत जाने के बाद भी फसलों को हुए नुकसान का कोई जायजा तक लेने नहीं आया है।
                                 किसान पुत्तूलाल, नगला निरंजन


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