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बाजारों में नहीं बिकेगी नि:शुल्क किताबें

ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी Updated Thu, 02 Apr 2015 11:08 PM IST
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मैनपुरी। परिषदीय स्कूलों में मिलने वाली पाठ्य पुस्तकें अब बाजारों में नि:शुल्क नहीं बिक सकेंगी। इसके लिए उप्र शिक्षा निदेशक क्रय पुस्तक प्रभारी ने सख्त कदम उठाए हैं। इसके चलते सर्व शिक्षा अभियान और उत्तर प्रदेश शिक्षा परिषद की पुस्तकाें को अलग-अलग कर दिया है। साथ ही पेज नंबर एक से लेकर चार तक नीले अंकों से नि:शुल्क लिखा होगा।
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पिछले वर्षों में इन पुस्तकों को बाजार में बिकते हुए पकड़ा गया। इसके चलते शासन ने इन पुस्तकों पर कोडिंग प्रक्रिया शुरू की है। विभागीय सूत्रों की माने तो जिले में संचालित बेसिक स्कूलाें के लिए हर बार 20 से 23 लाख किताबें आती हैं। जबकि जरूरत मात्र15 से 10 लाख की होती है।

यह अंकित होंगे कोड
उत्तर प्रदेश शिक्षा परिषद की पुस्तकों पर एस (सेल) लिखा होगा। सर्वशिक्षा अभियान की किताबाें पर एफ (फ्री) लिखा होगा। फ्री मिलने वाली किताबों पर 16 अंक का विशेष कोड होगा। इसमें दो अंको का कोड शहर का परिवहन नंबर होगा। दो अंक विभाग के मुद्रक कोड (जिसे प्रकाशक को आवंटित किया जाता है)। कवर पेज पर सात अंक का कोड होगा। मुख्य पृष्ठ पर पेज नंबर और चार पर नीले रंग से नि:शुल्क लिखा होगा।
अक्षरों से होगी पहचान
इसके अलावा प्रत्येक किताब पर अक्षर बनाकर पहचान दी जाएगी। जैसे कक्षा एक से तीन तक की पुस्तकों पर क, कक्षा चार से पांच तक की पुस्तकों पर ख, कक्षा छह पर ग, कक्षा सात पर घ और कक्षा आठ की पुस्तकों पर ढ लिखा होगा।
सरकार की इस पहल से सरकारी किताबें बेचने वालों पर काफी हद तक रोक लगेगी। वहीं किताबों के बिक्रेता भी चोरी छिपे सरकारी किताबों को नहीं खरीद सकेंगे। शासन के निर्णय अनुसार ही कार्य किया जाएगा।
प्रदीप कुमार, बीएसए

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