बरनाहल में सिंचाई की समस्या बढ़ी

Mainpuri Updated Tue, 06 May 2014 05:30 AM IST
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मैनपुरी। बरनाहल क्षेत्र के किसान सिंचाई के साधन न होने से परेशान हैं। वर्ष 1991 में ब्लाक क्षेत्र को डार्क एरिया घोषित किया गया और वर्ष 2012 में सरकारी नलकूपों की बोरिंग पर भी रोक लगा दी गई। क्षेत्र में न तो नि:शुल्क बोरिंग योजना ही चलाई जा रही है और न ही नलकूप लगाने पर किसी प्रकार की सब्सिडी दी जा रही है। निजी नलकूप के लिए बिजली कनेक्शन और बैंक ऋण पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में बरनाहल क्षेत्र में फसलों की सिंचाई की समस्या और बढ़ गई है।
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प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में गिरते जलस्तर पर अंकुश लगाने के लिए बरनाहल समेत प्रदेश के 108 ब्लाक क्षेत्रों में सरकारी नलकूपों की बोरिंग पर रोक लगा दी थी। डार्क एरिया घोषित ब्लाक क्षेत्र में निजी नलकूपों की बोरिंग पहले से ही प्रतिबंधित है। ब्लाक क्षेत्र में अब तक जल स्तर ऊंचा उठाने की दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की गई है। परिणामस्वरूप हैंडपंप और नलकूप चलते-चलते ही पानी छोड़ रहे हैं।
क्षेत्र में सिंचाई के पर्याप्त साधनों के अभाव में किसानों की फसलें प्रभावित हो रहीं हैं। क्षेत्र के 50 से अधिक गांव आज भी ऐसे हैं जहां सरकारी नलकूप नहीं हैं। ग्राम कठौली, नगला हरी सिंह, नगला महाराम, ककर्रा, सैयदपुर केहरी, नगला धर्मपाल, खुशालपुर, फूलापुर, मिलिक जैसे कई ग्रामों के किसान सरकारी नलकूप लगवाए जाने की मांग करते आ रहे हैं। सरकारी नलकूप, निशुल्क बोरिंग, ट्यूबवेल के लिए बोरिंग, बिजली कनेक्शन और नलकूप के लिए बैंक ऋण पर प्रतिबंध लगने से किसानों की समस्या और बढ़ गई है।
किसान मेवाराम का कहना था कि जलस्तर में निरंतर आ रही गिरावट के चलते सार्वजनिक हैंडपंप की बोरिंग तीन सौ फीट पर करानी पड़ रही है। बाबूराम ने बताया कि जल स्तर गिरने से निजी नलकूपों से 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई करनी पड़ रही है। सरकार को सिंचाई और पीने के लिए पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।

प्रथम पंचवर्षीय योजना के नलकूप बने शोपीस
वर्ष 1952 में प्रथम पंच वर्षीय योजना में क्षेत्र में लगवाए गए करीब एक दर्जन सरकारी नलकूप शोपीस बन चुके हैं। वहीं क्षेत्र के अन्य आधा दर्जन सरकारी नलकूप खराब चल रहे हैं या पानी छोड़ गए हैं। सिंचाई के साथ पीने के पानी की किल्लत भी बढ़ गई है। क्षेत्र के अधिकांश सरकारी हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। कई हैंडपंपों से पानी के साथ बालू आने की शिकायतें मिल रहीं हैं।

क्षेत्र में नहीं कोई नहर: रजबाह
जिले का बरनाहल विकास खंड ही एक मात्र ऐसा ब्लाक क्षेत्र है जिसमें नहर और रजबाहे हैं ही नहीं। क्षेत्र से गुजरने वाली एक मात्र सेंगर नदी भी सूख गई है। सेंगर नदी में बारिश के दिनों में ही पानी रहता है। ऐसे में क्षेत्र में फसलों की सिंचाई के लिए केवल नलकूप ही सहारा हैं।

अभी घोषणा तक ही सीमित है प्रस्तावित नहर
बरनाहल क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा और भूगर्भ जल स्तर ऊंचा उठाने के लिए प्रदेश सरकार ने ब्लाक क्षेत्र में नहर बनवाने की घोषणा की है। प्रस्तावित नहर बनने से ब्लाक क्षेत्र के सौ से अधिक ग्रामों के किसानों की फसलों की सिंचाई हो सकेगी। प्रस्तावित नहर का काम देख रहे अधिशासी अभियंता नहर इटावा जेके शर्मा का कहना है कि अभी नहर बनने की दिशा में कोई कार्य शुरू नहीं हो सका है और न ही बजट मिला है। नहर के लिए सर्वे का काम किया जा रहा है।
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