अच्छी नौकरी के लिए प्रदेश छोड़ रहे खिलाड़ी

Mainpuri Updated Sat, 26 Oct 2013 05:37 AM IST
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मैनपुरी। अच्छी नौकरी के अभाव में प्रदेश के वालीबाल के श्रेष्ठ खिलाड़ी पलायन करने को मजबूर हैं। यह कहना है पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं चैंपियनशिप में चयन समिति के सदस्य के रूप में भाग लेने आईं कुमारी भानु प्रसाद का।
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वह शुक्रवार को क्रिश्चियन मैदान में ‘अमर उजाला’ से बातचीत कर रही थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वालीबाल खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। कई महिला खिलाड़ियों ने प्रदेश का ही नहीं अपितु देश का भी नाम गौरवान्वित किया है। वालीबाल खिलाड़ियों को सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर तवज्जो न मिलने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि यही हाल रहा तो बच्चे वालीबाल से ही मुंह फेर लेंगे। खिलाड़ियों को न तो जॉब मिलता है और न ही अपेक्षित सम्मान। उन्होंने बताया कि शामली के बनक गांव की पूनम चौधरी और रेवा चौधरी महिला भारतीय टीम की ओर से कई देशों में खेलीं, लेकिन उन्हें प्रदेश में नौकरी नहीं मिली। मजबूरन उन्हें दूसरे प्रदेश में नौकरी के लिए जाना पड़ा। इसी प्रकार पिंकी चौरसिया, शैफाली वर्मा, स्तुति पांडेय, नाजिया खान, सोनिया मलिक, खुशबू पांडेय, रेशू तोमर जैसी श्रेष्ठ वालीबाल महिला खिलाड़ी दूसरे प्रदेशों की ओर से खेलने को मजबूर हैं।
सुविधाओं के साथ मिले नौकरी
चैंपियनशिप में साईं सेंटर, अमोसी से भाग ले रही प्रीति सिंह वर्ष 2012 में जूनियर एशियन वालीबाल चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह सीनियर और जूनियर नेशनल वालीबाल प्रतियोगिता में प्रदेश का भी प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनका कहना था कि प्रदेश के गौरव को बढ़ाने के लिए खिलाड़ियों को सुविधाओं के साथ नौकरी भी मिलनी चाहिए।

क्रिकेट जैसा नहीं मिलता सम्मान
साईं सेंटर, अमोसी की ही अंशू रानी ने वर्ष 2010 में एशियन वालीबाल चैंपियनशिप में देश की ओर से प्रतिनिधित्व किया था। नेशनल सीनियर और नेशनल जूनियर में दो बार प्रतिभाग कर चुकीं अंशू ने कहा कि क्रिकेट जैसा सम्मान वालीबाल खिलाड़ियों को नहीं मिलता। यही कारण है कि अब लड़के और लड़कियां वालीबाल कम खेलते हैं।

सम्मान न मिलने से जा रहीं दूसरे प्रदेशों में
वर्ष 2012 में जूनियर एशियन वालीबाल चैंपियनशिप में देश की ओर से प्रतिभाग कर चुकीं पारुल चौधरी का कहना है कि प्रदेश की एक दर्जन से अधिक महिला खिलाड़ियों ने प्रदेश और देश को गौरवान्वित किया है। इसके बावजूद उन्हें न तो नौकरी मिली और न सम्मान। यही कारण है कि अधिकांश वालीबाल खिलाड़ी मध्य प्रदेश, दिल्ली, केरल आदि में नौकरी कर उन्हीं प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर रही है।

वालीबाल को बढ़ावा देने के हों प्रयास
सीनियर और जूनियर नेशनल वालीबाल चैंपियनशिप में प्रदेश की ओर से खेल चुकी ज्योति पांडेय का कहना था कि विश्वस्तर पर देखा जाए तो फुटबाल से बेहतर स्थिति वालीबाल की है। विश्व में भारतीय वालीबाल टीम का स्थान 27वां है, वहीं फुटबाल में 123वां। इसके बावजूद वालीबाल से अधिक फुटबाल खेल लोकप्रिय हो रहा है। वालीबाल को बढ़ावा देने के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर प्रयास की आवश्यकता है।

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