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लंबे संघर्ष की जीत पर झूमा किशनी

Mainpuri Updated Sat, 09 Feb 2013 05:30 AM IST
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मैनपुरी/किशनी। 21 साल के संघर्ष के बाद आखिर किशनी को तहसील का दर्जा मिल ही गया। किशनी को तहसील बनाने की खुशी क्षेत्र के हर चेहरे पर साफ देखी गई। लोगों का कहना था कि 21 साल से तहसील बनाए जाने की मांग के लिए जारी संघर्ष आखिर रंग ले ही आया। अब तहसील संबंधी छोटे-मोटे कामों के लिए 25 किमी दूर भोगांव नहीं जाना पड़ेगा।
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शुक्रवार को देर शाम जैसे ही यह खबर आई कि प्रदेश सरकार ने किशनी को तहसील बनाने की मंजूरी दे दी है तो लोग खुशी से उछल पड़े। कई स्थानों पर लोगों ने मिष्ठान बांट कर खुशी का इजहार किया। लोगों का कहना था कि सरकार की इस घोषणा से क्षेत्र के लोगों का समय भी बचेगा और भोगांव जाने के लिए किराए में खर्च होने वाला पैसा भी बचेगा। तहसील बनने से न सिर्फ तहसील संबंधी कामकाज निपटाने में आसानी होगी बल्कि क्षेत्र में प्रगति आएगी।

किशनी तहसील को मंजूरी मिलने से खुश अमित चक का कहना था कि किशनी क्षेत्र के लोगों की मांग आखिर पूरी हो ही गई। तहसील बनने से अब तहसील संबंधी प्रमाण पत्र आसानी से सुलभ हो सकेंगे। प्रवेश यादव ने तहसील बनने पर खुशी जताते हुए कहा कि वर्षों से तहसील की मांग को जारी संघर्ष का आखिर परिणाम आ ही गया। सैफई में की गई घोषणा को मुख्यमंत्री ने पूरा कर क्षेत्र के लोगों का दिल जीत लिया है। नगर पंचायत अध्यक्ष जैसीराम यादव ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि तहसील बनने से क्षेत्र में प्रगति के नए आयाम स्थापित होंगे।
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1991 में मांग को लेकर छेड़ा था आंदोलन
वर्ष 1991 में सुधीर गुप्ता, विनोद गुप्ता, आदित्य सिंह चौहान और रवींद्र सिंह भदौरिया ने ‘तहसील बनाओ’ संघर्ष समिति का गठन कर तहसील बनाने के लिए आंदोलन की शुरुआत की थी। तब भाजपा सरकार ने किशनी को तहसील बनाने का आश्वासन तो दिया था लेकिन पूरा नहीं किया। वर्ष 2005 में सपा की सरकार के दौरान एक बार फिर मांग तेज हुई और लोगों ने कई दिनों तक आंदोलन किया। वर्ष 2012 में सपा की सरकार बनने पर एक बार फिर तहसील की मांग तेज हुई और पांच सितंबर को विनोद यादव, सुधीर गुप्ता, सतीश सविता, रामबाबू सविता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने लखनऊ पहुंच कर मुख्यमंत्री को तहसील बनाने की मांग संबंधी ज्ञापन भेंट किया। चार अक्तूबर को सैफई में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किशनी को तहसील बनाए जाने की घोषणा की।
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भोगांव के वकीलों और जागीर के ग्रामीणों ने किया विरोध
चार अक्तूबर 2012 को सैफई में मुख्यमंत्री द्वारा किशनी को तहसील बनाए जाने की घोषणा के विरोध में भोगांव के अधिवक्ता आगे आ गए। अधिवक्ताओं ने कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किए और किशनी को भोगांव तहसील में ही बनाए रखने की मांग उठाई। यही नहीं जागीर ब्लाक क्षेत्र के 15 से अधिक ग्रामों के लोगों ने भी हस्ताक्षर अभियान चलाकर ब्लाक क्षेत्र के ग्रामों को किशनी के बजाय भोगांव तहसील में ही संबद्ध रखने की मांग की।

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