चुनौतियां अभी और बाकी

Mainpuri Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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मैनपुरी। 1950 में गणतंत्र बनने के बाद से देश लंबा सफल तय कर चुका है। इस फासले का असर गण और तंत्र दोनों पर पड़ा। भ्रष्टाचार गणतंत्र पर इस कदर हावी है कि लोग परेशान हैं। बिना सुविधा शुल्क दिए कोई काम नहीं होता। सरकारी योजनाएं हों या जनकल्याणकारी कार्य सभी में भ्रष्ट कार्यशैली के चलते पात्रों को और आम जनता को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह जाती है।
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राशन कार्ड बनवाना हो या तहसील से फर्द खतौनी की नकल लेनी हो तो सुविधा शुल्क देना ही पड़ता है। हालात यह हो गए हैं कि थाने में रिपोर्ट भी तभी दर्ज होती है जब पुलिस को कुछ भेंट चढ़ाई जाए। सरकारी योजनाआें का भी यही हाल है। विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्र होते हुए भी सुविधा शुल्क देना मजबूरी बन गई है। सामाजिक कार्यकर्ता ओपी चांदना कहते हैं कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार कुछ इस तरह घुल सा गया है कि जायज काम के लिए भी पैसा देना लोगों की आदत में शुमार हो गया है।

ग्राम नगरिया के राकेश कुमार के मुताबिक मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए उसने 15 दिनों तक तहसील के चक्कर काटे लेकिन प्रमाण पत्र नहीं बनवा सके। बाद में एक साथी की राय पर 400 रुपये खर्च किए और तीन दिन में मूल निवास प्रमाण पत्र बनकर उनके हाथ में आ गया। सेना में भर्ती हुए नवीन ने बताया कि पुलिस बेरीफिकेशन रिपोर्ट तभी लग सकी जब उसके पिता ने थाने में 500 रुपये खर्च किए। बिजली का पावर कनेक्शन लेने वाले अमित प्रताप ने बताया कि कनेक्शन लेने के लिए उन्हें बाबू को डेढ़ हजार रुपये की भेंट चढ़ाई पड़ी तभी उसने लाइन आर्डर बनाकर दिया।
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डीएम और सीडीओ पर भी आरोप
जिले में फरवरी 2011 में मिड-डे मील में करीब 19 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया तो लोग हैरत में रह गए। घोटाले में शिक्षाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मिली भगत सामने आई। सीबीआई द्वारा की गई जांच में डीएम एसएन दुबे, डीसी शुक्ला (दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं), सीडीओ जेबी सिंह, एचएस चतुर्वेदी, बीएसए केडीएन राम, रघुवीर सिंह, जिला समन्वयक मिड-डे मील प्रशांत मिश्रा, उप बेसिक शिक्षाधिकारी रमेश चंद्र वर्मा, लेखाधिकारी शीलेंद्र यादव आदि की घोटाले में संलिप्तता पाई गई थी। सीबीआई ने जांच के बाद दोनों सेवानिवृत्त डीएम और दोनों सीडीओ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर ली है।
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बीपीएल कार्डों में बड़े पैमाने पर धांधली
बीपीएल कार्डों में बडे़ पैमाने पर धांधली की शिकायतें आ रहीं हैं। पात्र बीपीएल कार्ड के लिए भटक रहे हैं और रसूखदार लोगों ने बीपीएल कार्ड बनवा लिए हैं। बीपीएल कार्ड में धांधली की दो हजार से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं और अब तक जांच के बाद करीब डेढ़ सौ कार्ड ही निरस्त किए जा सके हैं। कई ग्रामों से तो ऐसी शिकायतें आईं हैं कि ग्राम प्रधान ने अपने परिवार के सदस्यों के ही बीपीएल कार्ड बनवा लिए हैं।
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सतीश ने भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी मुहिम
भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ लोग आवाज तो उठा रहे हैं लेकिन उनके प्रयास परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं। किशनी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता सतीश सविता ने जरूर कुछ मामलों में सफलता पाई है। उनके प्रयास से किशनी नगर पंचायत की करीब 500 बीघा और ग्राम पंचायत अरसारा की करीब 90 बीघा जमीन दबंगों के कब्जे से मुक्त कराई गई और तहसीलदार और एक लेखपाल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई।

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