चहुं ओर से आवाज आई...हाय महंगाई

Mainpuri Updated Sat, 15 Sep 2012 12:00 PM IST
मैनपुरी। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों को केंद्र सरकार ने महंगाई की आग में झोंकने का काम किया है। गुरुवार की अर्धरात्रि से डीजल पर एक साथ पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी किए जाने की समाज के हर तबके द्वारा निंदा की जा रही है। अन्नदाता कह रहा है कि अब खेती की लागत और बढ़ जाएगी। वहीं सब्सिडी के गैस सिंलेंडरों की संख्या घटाए जाने से गृहणियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
डीजल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि होने की संभावनाएं गुरुवार की रात हकीकत में बदल गईं। हर कोई केंद्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना करता दिखाई दिया। सबसे अधिक गुस्सा गृहणियों में है। साल में महज छह गैस सिलेंडर सब्सिडी पर दिए जाने और उसके बाद प्रति सिलेंडर 750-775 रुपये में दिए जाने के फैसले से गृहणियां खासी खफा हैं। वहीं किसानों का कहना है कि पहले से ही उपज की लागत नहीं निकल रही है और अब डीजल के दाम एक साथ पांच रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाने से तो किसान बर्बाद ही हो जाएंगे।
गृहणी वंदना राठौर का कहना था कि पहले से ही महंगाई से रसोई का बजट गड़बड़ाया हुआ है। माह में एक सिलेंडर तो लग ही जाता है, ऐसे में छह सिलेंडरों के बाद 750 से 757 रुपये प्रति सिलेंडर लेने में तो घर का सारा बजट ही गड़बड़ा जाएगा। महंगाई के बीच किचन के खर्चों में अब और कटौती करना मुश्किल हो चला है। रसोई गैस से ही साल में करीब 2100 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भारी इजाफे के केंद्र सरकार के फैसले को जन विरोधी बताते हुए गृहणी सुमीरा भदौरिया ने कहा कि महंगाई के दौर में डीजल और रसोई गैस की कीमत में की गई वृद्धि मुंह से निवाला छीनने के समान है। छह सिंलेंडरों के बाद खाना पकाना और भी महंगा हो जाएगा। डीजल और रसोई गैस के बढ़े दामों से साल में करीब तीन हजार रुपये का बोझ और बढ़ जाएगा।
एलाऊ के किसान जिलेदार सिंह का कहना था कि पिछले दो सालों से उपज की लागत भी नहीं निकल रही और अब डीजल के दाम बढ़ने से किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
बाजार आए अजय सिंह ने कहा कि अब आम आदमी के लिए घर का खर्चा चलाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। घर के खर्चे में प्रतिमाह करीब 10 फीसदी की वृद्धि हो जाएगी।
कार में डीजल भरवाने आए अनुपम गुप्ता ने कहा कि दाम बढ़ने से सभी वर्गों के हित प्रभावित होंगे। उनकी जेब पर ही प्रतिमाह करीब एक हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। उनका कहना था कि केंद्र सरकार महंगाई रोकने में पूरी तरह विफल रही है।
जुताई-सिंचाई भी हुई महंगी
शुक्रवार को सुबह ही अधिकांश ग्रामों में ट्रैक्टर से जुताई के रेट सौ रुपये से बढ़ाकर 110 रुपये प्रति बीघा कर दिए गए। कई किसान हैरत में थे कि अचानक 10 रुपये की बढ़ोत्तरी कैसे हो गई। वहीं सिंचाई के दामों में भी प्रति घंटा 10 रुपये की वृद्धि की बात कही जा रही है।
प्राइवेट वाहनों का बढ़ा किराया
डीजल के दाम बढ़े तो प्राइवेट बसों और डग्गामार जीपों के संचालकों ने भी किराए बढ़ा दिए। शुक्रवार को अचानक किराया बढ़ाए जाने को लेकर यात्रियों और वाहन चालकों के बीच नोंकझोंक भी हुई। डग्गामार और प्राइवेट वाहनों ने किराए में पांच फीसदी तक की बढ़ोत्तरी कर दी है।
ढुलाई भाड़ा बढ़ाना मजबूरी
डीजल के दामों में पांच रुपए प्रति लीटर की वृद्धि से ट्रांसपोर्टर्स में भारी आक्रोश है। उनके अनुसार डीजल की कीमतें बढ़ने से यह व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। डीजल के दाम बढ़ने पर ढुलाई के रेट बढ़ाना उनकी मजबूरी है। पब्लिक कैरियर्स ऐसोसियेशन के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश गुप्ता का कहना था कि डीजल के दाम बढ़ने से ढुलाई में वृद्धि करनी ही पड़ेगी। इस पर चर्चा के लिए जल्द संगठन की बैठक बुलाई जाएगी।

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