बदलते मौसम में 11 ने गंवाई जान

Mainpuri Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
मैनपुरी। मौसम में बदलाव के साथ ही जनपद में संक्रामक रोगों से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ रही है। बुखार और संक्रामक रोगों से अब तक 11 रोगियों की मौत हो चुकी है। कई ग्रामीण इलाकों में हर घर में कोई न कोई सदस्य संक्रामक रोग की चपेट में है। संक्रामक रोगों पर नियंत्रण के लिए सरकारी उपाय नाकाफी हैं।
जिले में संक्रामक रोगों का प्रकोप शुरू हो चुका है। जनपद के ग्रामीण इलाकों में स्थित स्वास्थ्य केंद्र रामभरोसे चल रहे हैं। अधिकांश नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात चिकित्सक जाते ही नहीं। केवल नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही नहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र औंछा और भोगांव में चिकित्सक की तैनाती के बाद भी रोगियों को समुचित उपचार नहीं मिल रहा है। चिकित्सकों के नहीं रहने से रात के समय तो रोगियों को जिला मुख्यालय या फिर प्राइवेट चिकित्सक के यहां ही जाना पड़ रहा है।
जनपद में मार्च से अब तक तेज बुखार और संक्रामक रोगों से पीड़ित होने पर 11 रोगियों की मौत हुई है। संक्रामक रोग नियंत्रण की बात करें, तो जिले के हर सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसके साथ ही जिला मुख्यालय पर भी कंट्रोल रूम बनाया गया है। निर्देश हैं कि कंट्रोल रूम पर सूचना मिलते ही तत्काल टीम प्रभावित गांव में पहुंचकर रोगियों को उपचार देगी, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर चिकित्सक रात ही नहीं दिन में भी नदारद रहते हैं, जिससे रोगियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अकेले जिला अस्पताल में बुखार एवं अन्य रोगों से पीड़ित होने पर प्रतिदिन औसतन 500 से अधिक रोगी पहुंच रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों और दवा नहीं मिलने के चलते रोगी जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।

सीधे सूचना दें
अगस्त में जनपद के छह गांवों में संक्रामक रोग फैले। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इन गांवों में पहुंचकर रोगियों को उपचार दिया। इनमें से दो गांवों में जिला मुख्यालय तथा चार गांवों में पीएचसी और सीएचसी की टीमें गई हैं। सीएमओ डा. वीके गुप्ता का कहना है कि पीएचसी/सीएचसी के कंट्रोल रूम पर सूचना देने के बाद कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीण उन्हें सूचना दे सकते हैं। टीम तत्काल गांव में पहुंचकर रोगियों को उपचार देगी। उन्होंने बुखार या संक्रामक रोग से मौत होने की जानकारी से इंकार किया।

सूचनाएं मिलती समाचार पत्रों से
जागरूकता की कमी कहें या फिर सिस्टम की खामी। स्वास्थ्य अधिकारियों और सरकारी चिकित्सकों का कहना है कि संक्रामक रोगों के प्रकोप और बुखार आदि से मौत की जानकारी ज्यादातर समाचार पत्रों से ही मिलती है। समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित होने के बाद टीमें संबंधित गांवों में पहुंचती हैं।

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