विभागों से निराशा, दिवस से हताशा

Mainpuri Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
मैनपुरी/करहल/भोगांव। छह माह बाद तहसील दिवस शुरू हुए तो फिर न्याय की उम्मीद जगी। विश्वास जगा कि अब विभाग के अधिकारी समस्याएं सुनेंगे और गंभीरता से निस्तारण करेंगे। लेकिन, इन तहसील दिवसों से सिर्फ हताशा ही मिल रही है। परवान चढ़ने की बजाय ये फ्लाप साबित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि तीन तहसील दिवसों में 728 शिकायतों में से महज 234 शिकायतों का ही निस्तारण हो सका है। 494 लोग अब भी समाधान को निस्तारण की लाइन में खड़े हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में प्रत्येक जिले में तहसील दिवस शुरू किए गए थे। प्रारंभ में प्रत्येक मंगलवार को तहसील दिवस होता था। बाद में प्रत्येक माह के प्रथम और तृतीय मंगलवार को ये आयोजित होने लगे। 23 दिसंबर को विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के साथ ही ये बंद हो गए। 15 मार्च को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सत्तारूढ़ होने के बाद पहला तहसील दिवस 17 जुलाई को शुरू हो सका।
सरकारी विभागों से निराश लोगों को उम्मीद थी कि छह माह बाद पुन: शुरू हुए तहसील दिवस से उन्हें राहत मिलेगी लेकिन ये उम्मीद इसके शुरू होते ही बिखर गई। 17 जुलाई, सात अगस्त, 21 अगस्त को तीन तहसील दिवस हुए। भोगांव में दो तहसील दिवसों में 278 शिकायतें मिलीं। इसमें 98 ही निस्तारित हो सकीं। मंगलवार को 78 शिकायतों में से एक का ही निस्तारण हुआ। तहसील सदर में तीन तहसील दिवसों में 129 शिकायतों में मात्र पांच शिकायतों का ही समाधान हो सका है। करहल में पहले तहसील दिवस में 82 में से तीन का निस्तारण हुआ। दूसरे में 75 में से 45 और तीसरे में 86 में से 82 का निस्तारण हुआ। अन्य तहसीलों की अपेक्षा करहल तहसील के तहसील दिवस की स्थिति फिर भी संतोषजनक है। तहसील दिवसों में राजस्व, बिजली, सिंचाई आदि की शिकायतें सर्वाधिक होती हैं। तहसील दिवस में पहले तो मामलों का निस्तारण ही नहीं होता है। निस्तारण किया भी जाता है तो उसकी महज रस्म अदायगी होती है। इससे पीड़ित व्यक्ति को इस दिवस से भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण मैनपुरी सदर तहसील में देखने को मिला। पिछले दो तहसील दिवसों के 22 मामले निस्तारित किए गए। निस्तारित मामलों की रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी गई। जांच में पाया गया कि निस्तारित मामलों की रस्म अदायगी भर की गई है। किसी भी मामले का वास्तविक समाधान नहीं निकाला गया। लिहाजा एसडीएम निस्तारित मामलों से संतुष्ट नहीं हुए और ये 22 मामले पुन: निस्तारित के लिए संबंधित अधिकारियों को वापस भेज दिए गए हैं।

वहीं बिछवां ब्लाक क्षेत्र सुल्तानगंज के ग्राम धनमऊ के ओमप्रकाश ने सात अगस्त को भोगांव में हुए तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र दिया था। प्रार्थना पत्र का नंबर 190 पंजीकृत किया गया। पत्र में कहा गया कि चकरोड ग्रामसभा की भूमि पर है। कुछ दबंगों ने इस चकरोड को अपने खेत में मिला लिया है। इससे रास्ता बंद हो गया है। तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देने के बावजूद अभी तक मौके पर लेखपाल और कानूनगो पैमाइश को नहीं पहुंचे हैं। दूसरे तहसील दिवस में भी उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला।
विकास क्षेत्र किशनी के गांव नगला दुगई के श्याम बिहारी ने पिछले तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देते हुए कहा कि सरकारी नलकूप की नाली उनके खेत के समीप से निकलती है। इस पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। इससे सिंचाई बाधित है। उनका कहना है कि पिछले तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देने के बावजूद अभी तक सिंचाई का कोई अधिकारी, कर्मचारी या लेखपाल मौके पर नहीं पहुंचा है। नाली बंद है। दूसरे तहसील दिवस में भी उन्हें आश्वासन ही मिला है।


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