तेज सिंह ने उखाड़े थे गोरों के पांव

Mainpuri Updated Sun, 05 Aug 2012 12:00 PM IST
मैनपुरी। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की मेरठ में हुई शुरुआत के ठीक दूसरे दिन ही मैनपुरी में भी विद्रोह की चिंगारी भड़क उठी थी। तत्कालीन महाराजा तेज सिंह की अगुवाई में आजादी की जंग शुरू हो गई। तत्कालीन कलेक्टर जेम्स पावर जब तक विद्रोह के प्रति सचेत होते तब तक नगर के निकटवर्ती गोला बाजार में रुकी अंग्रेजी फौज की नौवीं पलटन सेना की कई टुकड़ियों के फौजियों ने भी तेज सिंह के नेतृत्व में बगावत का बिगुल फूंक दिया। करीब डेढ़ माह तक चले युद्ध के बाद मैनपुरी राज्य को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त करा लिया गया।
प्रथम स्वाधीनता आंदोलन में महाराजा तेज सिंह के योगदान का भुलाया नहीं जा सकता। युवा राजा तेज सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध की तैयारी शुरू की ही थी कि इसी दौरान मेरठ में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया गया। भारतीय फौजियों द्वारा किए गए विद्रोह की जानकारी मिलने पर यहां तैनात अंग्रेज सेना की नौंवी पलटन के नेतृत्व विहीन सैनिकों ने महाराजा तेज सिंह के किले में पहुंचकर उनके साथ अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। अंग्रेजों की नीतियों से दुखी और परेशान जिले के कई जमींदार और किसान भी स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए।
12 मई 1857 को जिले में तैनात अंग्रेजी सेना और अधिकारियों के साथ महाराजा तेज सिंह के नेतृत्व में युद्ध शुरू हो गया। 12 मई से 28 जून तक चले युद्ध में अंतत: अंग्रेजों के पांव उखड़ गए। तत्कालीन अंग्रेज कलेक्टर जेम्स पावर और उनके भाई सिटी मजिस्ट्रेट जान पावर को भी मैनपुरी छोड़कर आगरा भागना पड़ा। मैनपुरी राज्य की स्वतंत्रता में नौवीं पलटन के हिंदुस्तानी फौजियों की भूमिका अविस्मरणीय रही। युद्ध में सौ से अधिक सैनिकों ने स्वतंत्रता के लिए बलिदान दे दिया।
करीब चार माह की आजादी के बाद आगरा, ग्वालियर, दिल्ली और कानपुर की ओर से आई अंग्रेजी सेना ने मैनपुरी पर आक्रमण किया। युद्ध में पराजय देख महाराज तेज सिंह को किला छोड़कर भागना पड़ा और उन्हें अंग्रेजी सेना ने इटावा में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। महाराजा तेज सिंह का किला अंग्रेजों से मैनपुरी राज्य को चार माह के लिए स्वतंत्र कराने में बलिदान देने वालों की मूक गवाही देता नजर आता है।

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