कजली मेले का बजट अभी तक स्वीकृत नहीं

Mahoba Updated Wed, 25 Jul 2012 12:00 PM IST
महोबा। उत्तर भारत के मशहूर कजली मेले की तैयारियां पालिका प्रशासन ने भले ही शुरू न की हों, लेकिन मेले में शिरकत करने आने वाले दूर दराज के दुकानदाराें और झूला संचालकाें ने डेरा जमा लिया है। दुकानाें की जगह पहले से पाने के लिए बाहरी दुकानदाराें ने आमद दर्ज कर दुकानें बनानी शुरू कर दी है लेकिन नगर पालिका ने अभी तक मेले के लिए बजट ही स्वीकृत नहीं कराया है।
831 साल पुराना ऐतिहासिक कजली मेले में हर साल लाखाें की भीड़ जुटती है। 3 अगस्त से शुरू होने वाले कजली मेले के महज नौ दिन शेष रह जाने के बाद भी पालिका प्रशासन द्वारा मेले का बजट स्वीकृत कराने के लिए अभी तक बोर्ड की बैठक तक नहीं बुलाई गई। इसके चलते न तो मेले का बजट स्वीकृत हुआ और न ही मेले की तैयारियां शुरू हो पाईं। जिससे मेले के भव्य प्रदर्शन पर प्रश्नचिह्न लग गया है। गौरतलब है कि ऐतिहासिक कजली मेले में बुंदेलखंड के सैकड़ाें गांवाें के लोग शिरकत करते हैं। इसके अलावा अन्य जिलाें से भी मेले में शामिल होने के लिए लोगाें की भारी भीड़ जुटती है। तीन दिनाें तक चलने वाले इस कजली मेले को भव्य स्वरूप देने के लिए पालिका प्रशासन लाखाें रुपए बजट स्वीकृत करती है लेकिन इस साल अभी तक बोर्ड की बैठक तक नहीं बुलाई गई जिससे न तो कजली मेले के लिए बजट स्वीकृत हुआ और न ही मेले की तैयारियां शुरू हो सकीं। यहां तक कि पैंफ्लेट और बैनर तक नहीं छपवाए गए जिससे कजली मेले का प्रचार प्रसार भी नहीं हो पा रहा है। पालिका की ढुलमुल नीति के चलते मेले की तैयारियां फीकी पड़ गई हैं।
3 से 5 अगस्त तक चलने वाले ऐतिहासिक कजली मेला परिसर में दुकानदाराें ने दुकानाें की जमीन पाने के लिए बनारस, फिरोजाबाद, मथुरा के दुकानदाराें ने डेरा जमा लिया है। 831 साल से हालांकि अनवरत कजली मेला आयोजित किया जा रहा है। पालिका प्रशासन पहले दिन कजली मेले का आयोजन कीरत सागर के तट पर, दूसरे दिन गोरखागिरि पर और तीसरे दिन शहीद मेला हवेली दरवाजा प्रांगण में आयोजित किया जाता है लेकिन अब आल्हा परिषद एक सप्ताह तक कीरत सागर में मेले का आयोजन करता है जहां पर लाखाें की भीड़ जमा होती है।

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कजली मेले में आल्हा गायन की रहती है धूम
महोबा। कजली मेले में बुंदेलखंड के अलावा दूर दराज के आल्हा गायक भी शिरकत करते हैं। मेले के मौके पर प्रतिदिन आल्हा गायन और सांस्कृतिक कार्यक्रमाें की धूम रहती है। साल भर तक आल्हा गायन का कार्यक्रम पेश करने के लिए इंतजार करने वाले आल्हा गायक तैयारी के साथ आल्हा मंच तक पहुंचते हैं जहां पर पालिका प्रशासन द्वारा अच्छा प्रदर्शन करने वाले आल्हा गायकाें को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है। यहां पर उरई, कन्नौज, महोबा के अलावा अन्य जिलाें के आल्हा गायक भी हिस्सा लेते हैं और आल्हा गायन के जरिए यहां के लोगाें में जोश भर देते हैं। बड़े लड़इया महोबे वाले, जिनसे हार गई तलवार आल्हा गायन की यह पंक्ति आज भी लोगाें की जुबां पर रहती है।

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मेला परिसर में सफाई अभियान की शुरुआत तक नहीं
महोबा। तीन दिन तक चलने वाले कजली मेले में साफ सफाई व अस्थाई शौचालयाें की व्यवस्था पालिका प्रशासन द्वारा की जाती है। पहले दिन कीरत सागर के तट पर, दूसरे दिन गोरखागिरि परिसर में और तीसरे दिन हवेली दरवाजा मैदान में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मेले की साफ सफाई के लिए पालिका प्रशासन द्वारा सफाई कर्मचारियाें की टीम लगाई जाती है। कई दिन तक एक मेला परिसर की सफाई होती है। मेले के नौ दिन शेष रह जाने के बाद भी अभी तक किसी भी मेला परिसर में सफाई अभियान की शुरुआत तक नहीं की गई।



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