महंगाई के चलते थाली से गायब हो रहीं सब्जियां

Mahoba Updated Thu, 05 Jul 2012 12:00 PM IST
महोबा। आषाढ़ का महीना बीत गया, और मानसून का कहीं कोई अता पता नहीं। बिन बारिश के सूखे पड़े खेत और किसान दोनाें ही आसमान की तरफ निहार रहे हैं। वहीं खानपान की वस्तुआें के रेट का ग्राफ दिनाें दिन बढ़ता जा रहा है। दाल, चावल, तेल और सब्जियाें के दाम में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। मानसून की आमद कब होगी, यह तो कोई नहीं जानता लेकिन सब्जियाें के रेट कम होने के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आते।
पिछले साल जून में ही बारिश की शुरुआत हो गई थी लेकिन इस दफा जून तो दूर जुलाई माह के चार दिन बीत जाने के बाद भी मानसून ने दस्तक नहीं दी लिहाजा खेत बंजर पड़े हैं जिससे किसान खेतों की जुताई भी नहीं कर सका। उधर जिन खेताें में सब्जियाें की फसल थी, बारिश न होने से उसकी सिंचाई नहीं हो सकी। इतना ही नहीं रही सही कसर घटते जलस्तर ने पूरी कर दी। ट्यूबवेल और कुआें ने भी हाथ खड़े कर दिए। इससे उत्पादन कम हुआ। सब्जियाें के रेट में बढ़ोतरी हो गई। वहीं आसमान से आग बरस रही है जिससे सब्जी दुकानदार सब्जी जल्दी खराब न हो इस डर से कम मात्रा में रखकर महंगे दामाें पर बेच रहे हैं।
सब्जी के दाम बढ़ने से आम आदमी की थाली से सब्जियां गायब होती जा रही हैं। अब ऐसी महंगाई में आदमी क्या खाए और क्या पिए। दुकानाें में रखीं सब्जियां लोगाें को दूर से मुंह चिढ़ा रही हैं। लगभग 15 दिन पहले 10 रुपए किलो बिकने वाला आलू अब यह 15 रुपए किलो बिक रहा है। वहीं 15-20 रुपए किलो बिकने वाला टमाटर अब 30 रुपए किलो हो गया है। इतना ही नहीं 10 रुपए किलो बिकने वाली लौकी दोगुने रेट पर बिक रही है। पहले जेब भर पैसे लेकर बाजार जाने पर झोला भरकर सब्जी आ जाती थी लेकिन अब झोला भरकर पैसे लेकर जाने पर जेब भर सब्जी आती है।

इनसेट -------------------
तेल, दाल, सब्जी सब पर महंगाई की मार
जिंस 15 जून के दाम 4 जुलाई के दाम
अरहर 5400 6000
उड़द 5250 5700
मसूर मलका 4150 4500
मसूर 4000 4300
मटर 3000 3300
चना 4800 5650
बासमती 3400 4000

तेल और सब्जियां
कड़ुवा तेल 82 88
आलू 10 15
लौकी 10 20
धनिया 70 80
प्याज 8 10
टमाटर 20 30
भिंडी 25 40
परवल 40 50
मिर्च 60 80

इनसेट -------------------
बारिश न हुई तो बुरा असर पड़ेगा
महोबा। थोक व्यापारी नीरज कुमार का कहना है कि यदि 8-10 दिन और बारिश न हुई तो इन वस्तुआें के दाम और बढ़ जाएंगे क्याेंकि बारिश न होने से इनकी आपूर्ति कम हो जाएगी।

इनसेट -------------------
धान के दाम ऊंचे रहने की आशंका
महोबा। थोक व्यापारी सुरेश कुमार का कहना है कि पहले जून माह में ही बारिश शुरू हो जाती थी जिससे धान की बुवाई भी समय पर होने के कारण पैदावार अच्छी होती थी लेकिन इस बार जुलाई में भी बारिश न होने से धान की बुवाई प्रभावित हो रही है जिससे इस बार धान के दाम भी काफी ऊंचे रहने की आशंका है।

इनसेट -------------------
...तो और बढ़ सकते हैं तेल के दाम
महोबा। व्यापारी सूरज साहू का कहना है कि तेल के दाम 15 दिन पहले 82 रुपए किलो थे। जो अब बढ़कर 88 तक पहुंच गए हैं। बारिश न होने के कारण ही दाम बढ़ते जा रहे हैं यदि जुलाई में भी अच्छी बारिश न हुई तो तेल के दाम और बढ़ सकते हैं।

इनसेट -------------------
बढ़ानी होगी अरहर की पैदावार
महोबा। किसान नेता भूपेंद्र कुमार साहू, रामरतन गुरुदेव का कहना है कि अरहर की दाल के दाम सभी दालाें में सबसे अधिक हैं क्याेंकि अरहर की दाल की खपत अधिक है और पैदावार कम। यदि दूसरी दालाें की तरह अरहर की दाल की पैदावार को बढ़ाया जाए तो अरहर की दाल के दाम गिर सकते हैं।

इनसेट -------------------
शक्कर से महंगा हो गया गुड़
वस्तु रेट (रुपए प्रति किलो)
गुड़ 36
शक्कर 34
गेहूं का आटा 14
अरहर की दाल 60
मसूर काली 45
चने की दाल 54


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