बिना प्रधानाचार्य के चल रहा है केंद्रीय विद्यालय

Mahoba Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
महोबा। जुलाई 2010 से संचालित शहर का केंद्रीय विद्यालय बिना स्थाई प्रधानाचार्य के चल रहा है जिससे विद्यालय में न तो शिक्षा का स्तर सुधर रहा है और न ही विद्यालय के लिए भूमि का चयन हो पा हा है। साथ ही विद्यालय से संबंधित लोगों का आरोप है कि गैर जनपदों से आने वाले प्रभारी प्रधानाचार्य केवल भत्तों और करोड़ाें के खरीद फरोख्त पर मिलने वाले कमीशन तक ही सीमित रहते हैं। उन्हें विद्यालय के विकास से कोई मतलब नहीं रहता।
केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2009-2010 में ललितपुर, झांसी, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा में केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति दी थी जिसके चलते जुलाई में ही यहां केंद्रीय विद्यालय संचालित हो गए। महोबा में पिछले दो वर्ष से प्रधानाचार्य का पद रिक्त चल रहा है। केंद्रीय विद्यालय में जुलाई 2010 में मात्र दो माह के लिए ही स्थाई प्रधानाचार्य की नियुक्ति की गई थी। इसके बाद यहां निरंतर बबीना, झांसी, उरई, जालौन के ही प्रधानाचार्यों को महोबा के विद्यालय का पदभार देकर काम चलाया जा रहा है। नतीजतन दो जिलों के कार्य भार के कारण प्रभारी प्रधानाचार्य यहां समय नहीं दे पाते और न ही विद्यालय के विकास में कोई रुचि लेते हैं। यही वजह है कि दो साल बाद भी विद्यालय की भूमि का चयन नहीं हो सका है। तीन हजार रुपए प्रतिदिन संबद्धता भत्ता के लिए ही प्रधानाचार्य यहां अपनी आमद कराकर कागजों में एक ही जगह से दो विद्यालय चलाते रहते हैं। अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां जब भी जाते हैं तो कभी भी प्रधानाचार्य नहीं मिलते। पूछने पर बताया जाता है कि वे सरकारी काम से बाहर हैं। इतना ही नहीं विद्यालय की लाखाें रुपए की प्रधानाचार्य द्वारा खरीददारी भी की जाती है। दो-दो विद्यालयाें का चार्ज होने के कारण प्रधानाचार्य द्वारा अधिक समय न दे पाने के कारण विद्यालय की भूमि के लिए पैरवी नहीं हो पा रही है।
विद्यालय के भवन निर्माण के लिए पिछले दो वर्षो से 15 करोड़ रुपए स्वीकृत हैं। किराए के भवन में चल रहे केंद्रीय विद्यालय का अनुबंध भी 30 जून 2012 को अनाथालाय से समाप्त होने जा रहा है। यदि यहां स्थाई प्रधानाचार्य पद की नियुक्ति होती तो अभी तक यहां विद्यालय का भवन बन चुका होता। अंधेरगर्दी की बात तो यह है कि यहां 10 माह तक केंद्रीय विद्यालय बिना प्रभारी प्रधानाचार्य के ही चलता रहा। केंद्रीय विद्यालय संगठन के भी इस पिछड़े जनपद की ओर स्थाई प्रधानाचार्य की नियुक्ति पर ध्यान नहीं दिया जबकि प्रभारी प्रधानाचार्य को तीन हजार रुपए प्रतिदिन का संबद्धता भत्ता दिया जाता है।

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सदर विधायक ने विधानसभा में उठाया मामला
महोबा। सदर विधायक राजनारायण बुधौलिया ने नियम 56 के तहत केंद्रीय विद्यालय में वर्षों से रिक्त चल रहे प्रधानाचार्य के पद का मामला विधानसभा में भी उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रभारी प्रधानाचार्य को सब्ंाद्धता भत्ता के रुप मेें प्रतिमाह मोटी रकम देने का क्या औचित्य है। इससे बेहतर है कि स्थाई प्रधानाचार्य की ही नियुक्ति कर दी जाए।

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क्या कहते हैं प्रभारी प्रधानाचार्य
महोबा। केंद्रीय विद्यालय उन्नाव के प्रधानाचार्य सुभाष चंद्रा को महोबा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस बारे में उनका कहना है कि शिक्षा के गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि केंद्रीय विद्यालय की प्रतिष्ठा पर आंच न आए। उन्होंने कहा कि भूमि चयन का मामला जिला स्तर पर राजस्व विभाग द्वारा निपटाया जाना है। जल्द ही भूमि चयन का मामला सुलझ जाएगा और भवन का निर्माण शुरू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय में कोई अव्यवस्था नहीं है।

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