सुगम यातायात को दो साल और इंतजार

Mahoba Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
374 करोड़ की लागत से बनना है कानपुर-कबरई में एनएचएआई की सड़क
- नहीं मिली पर्यावरणीय एनओसी
- 3500 पेड़ों की कटान बनी रोड़ा
- 12 हेक्टेयर भूमि होगी अधिग्रहीत
एके त्रिपाठी
कबरई (महोबा)। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय केंद्र सरकार से पर्यावरणीय एनओसी न मिल पाने के कारण मार्च 2011 से 374 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली कानपुर-कबरई की 123 किलोमीटर सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
डेढ़ दशक से ध्वस्त पड़ी कबरई-कानपुर सड़क को एनएच डिवीजन से जनवरी 2010 में एनएचएआई को स्थानांतरित किया गया था। मार्ग को केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा एनएचडीपी फेस-4 के अधीन पीपीपी के तहत निर्माण कराने की औपचारिक स्वीकृति वर्ष 2010-2011 में लागत 374 करोड़ रुपए के साथ दी थी। योजना के तहत सड़क बनाने वाली कंपनी को अपनी पूंजी लगाकर टू-लैन की 12 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण करना था। सड़क का निर्माण डेढ़ वर्ष में किया जाना था। सड़क बनाने के उपरांत लगाई गई पूंजी को निर्माण कराने वाली फर्म को 10 वर्षों तक तीन स्थानों पर टोल टैक्स लगाकर पथ कर वसूलना था। साथ ही सड़क के रखरखाव का काम भी सड़क बनाकर पथ कर वसूलने वाली फर्म के पास है।
इसी क्रम में 123 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने के लिए टेंडर आमंत्रित कर जनवरी 2011 में वित्तीय स्वीकृति भी भारत सरकार से प्राप्त कर ली गई और मार्च 2011 में दिल्ली की पीएनसी कंपनी को सड़क का अनुबंध गठित कर दिया गया। जिसमें एनओसी मिलने के बाद डेढ़ वर्ष में सड़क बनाने का जिम्मा पीएनसी को दिया गया। कंपनी ने अनुबंध गठित होेते ही गंज में दो करोड़ की लागत से अपना स्वचालित बड़ा क्रेशर प्लांट लगाया गया और तेजी से जीएसबी के अलावा अन्य ग्रिट का उत्पादन शुरू कर दिया। साथ ही मौदहा के पास मकरांव के विशाल परिसर में अपना स्टोर भी बना दिया। फिर भी आज तक सड़क का काम शुरू नहीं हो सका। साथ ही पीएनसी कंपनी को लाखों रुपए प्रति माह का व्यय अपने प्रबंधन पर करना पड़ रहा है।
निर्माण के पहले कानपुर नौबस्ता से कबरई के बीच लगे 3500 पेड़ काटे जाने हैं। कानपुर और कबरई के बीच 107 छोटी बड़ी पुलियों का निर्माण कराया जाना है। साथ ही एक से डेढ़ मीटर तक सड़क की ऊंचाई भी बढ़ाई जाएगी। सड़क के मध्य से 10-20 मीटर तक चौड़ाई बढ़ाई जाएगी और सड़क के दोनों तरफ कुल 12 मीटर की सड़क और तीन मीटर की पटरी होगी। सड़क किनारे दोनों तरफ किए गए अतिक्रमण को तोड़ा जाएगा और निजी भवन या भूमि स्वामित्व की होने पर तय सर्किल रेट पर मुआवजा भी देय होगा। निर्माण में बाधक बनने वाली 12 हेक्टेयर किसानों की भूमि 2.40 करोड़ की लागत से अधिग्रहीत की जाएगी और पर्यावरणीय कार्याें पर 5.96 करोड़ रुपए का खर्च एनएचएआई द्वारा किया जाएगा। प्रस्तावित सड़क में घाटमपुर, भरुआ, मौदहा, कबरई में कुल पांच किलोमीटर लंबी आरसीसी नालियों का भी निर्माण कराया जाएगा। 0.30 से डेढ़ मीटर के बीच ऊंची होने वाली सड़क में जीएसबी, डब्ल्यूबीएम, बीसी का काम 40 एमएम से 500 एमएम के बीच किया जाएगा। लेकिन अभी तक सड़क में केवल समतलीकरण और गड्ढा भरने का ही काम चल रहा हैै। पर्यावरण की एनओसी के लिए कानपुर और हमीरपुर के अलावा महोबा जिले से अंतिम मुहार लगनी है। एनओसी से संबंधित लोक सुनवाई नवंबर में ही की जा चुकी है। लेकिन आठ माह गुजर जाने के बाद भी एनओसी नहीं मिल सकी।

इंसेट
क्या कहते हैं प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी
कबरई महोबा। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण एनएएचआई के कानपुर क्षेत्र के परियोजना प्रबंधक नवीन मिश्रा का कहना है कि पर्यावरण की अनापत्ति से संबधित सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। साथ ही भूमि अधिग्रहण संबंधी गजट भी पास हो चुका है। जल्द ही इसी महीने में एनओसी मिल जाएगी और काम शुरू करा दिया जाएगा। काम शुरू होते ही डेढ़ वर्ष में काम पूरा हो जाएगा।

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