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जीवन को सुखी रखने के लिए परमात्मा का चिंतन जरूरी

Mahoba Updated Thu, 21 Jun 2012 12:00 PM IST
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महोबा। जीवन को सुखमय बनाने के लिए अपनी भागदौड़ वाली जिंदगी से कुछ क्षण निकाल कर हर आम आदमी को परमात्मा का चिंतन जरूर करना चाहिए। इससे मस्तिष्क के विकार लुप्त हो जाते हैं और जीवन को जीने का नया तरीका परब्रह्म की कृपा से स्वयं ही मिलने लगता है।
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बलखंडेश्वर स्थित धीरज धर्म आश्रम में बुधवार को सुबह सत्संग में संत विष्णुदेवानंद ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मनुष्य सभी प्रकार की मोहमाया में फंसकर भागदौड़ की मशीन मात्र बनकर रह गया है। इससे वह परब्रह्म परमात्मा के लिए भी कुछ क्षण नहीं निकाल पाता। जैसे हर दिन खाना पीना अन्य काम जरूरी होते हैं, उसी प्रकार दिनभर के कार्यो का शाम को चिंतन आत्मावलोकन करते हुए परमात्मा के प्रति ध्यान लगाना चाहिए जिससे मन को शांति मिलती है और मस्तिष्क में उनके प्रति सद्विचार स्वत: ही उठने लगते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य कर्तव्य मार्ग से विमुख नहीं हो पाता और परमात्मा की कृपा से शरीर स्फूर्तिवान होकर कुत्सित विचारों को खदेड़ देता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यदि हम कुछ क्षण परमात्मा के प्रति समर्पण भाव के साथ निकाल लें तो हमें आत्मिक सुख और आंनद की अनुभूति होगी। सत्संग के दौरान संतों के वचनों का श्रवण करने मात्र से ही मनुष्य को अलौकिक सुख की अनुभूति होती है। सत्संग के दौरान बसंत लाल गुप्ता, बूजेंद्र, शशि प्रभा, विरंचीलाल, मनोज, जगदीश बाबू, श्रीमती विमला देवी, सुंदरलाल गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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