छह माह बाद भी नहीं मिली गरीबों को छत

Mahoba Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
महोबा। बसपा सरकार द्वारा गरीबों को आशियाना मयस्सर कराने के लिए चलाई गई कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना नई सरकार और अधिकारियों की उदासीनता के चलते धराशाई हो गई है। महीनों से बने कांशीराम आवासों में प्रशासनिक उदासीनता के चलते पात्र लाभार्थियाें को कब्जे नहीं मिल पा रहे हैं। दिसंबर में लाटरी से पक्की छत मिलने की खुशी गरीबों के चेहरे से काफूर हो गई है।
वर्ष 2007 में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश की चौथी बार कमान संभालते ही जून 2008 में प्रदेश के झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले गरीबों को पक्की छत मुहैया कराने की महत्वाकांक्षी योजना को अमली जामा पहनाया था। प्रथम चरण में 1500 कांशीराम आवासों का निर्माण जिला मुख्यालय में कराया था। साथ ही 1500 गरीबों को झुग्गी झोपड़ी से निकालकर वर्ष 2010 में पक्की छत मुहैया करा दी गई थी। प्रथम चरण की सफलता के बाद मायावती सरकार ने दूसरे चरण में भी कांशीराम आवासों के निर्माण की कसबा चरखारी और कसबा खरेला में बनाने की घोषणा की। इसके क्रम में चरखारी डिग्री कालेज के सामने 216 आवास बनाकर दिसंबर 2012 में तैयार कर दिए गए। साथ ही खरेला नगर पंचायत में भी 300 कांशीराम आवास बनाकर तैयार कर दिए गए।
शासन के निर्देश पर दिसंबर 2012 में ही जिला नगरीय विकास अभिकरण डूडा ने पात्रों का चयन सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की टीम से कराया। पात्र गरीबों के चयन के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी एमके स्वामी बी ने दिसंबर माह में ही सभी गरीबों को लाटरी के माध्यम से कांशीराम आवासों कोे बांट दिया। साथ ही जल्द चयनित और लाटरी से मकान पा चुके लाभार्थियों को कब्जे दिलाए जाने की बात कही। छह माह से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन आज तक गरीबों को प्रशासन मकानों के कब्जे मुहैया नहीं करा सका जबकि मकान पानी बिजली फिटिंग सीसी सड़क और रंग रोगन से कंप्लीट खड़े हैं। प्रति मकान ढाई लाख रुपए शासन ने व्यय किया है। इस संबंध में डूडा के एपीओ अबरार अहमद का कहना है कि नगर निकाय चुनाव के बाद जलद ही गरीबों को कब्जे दिला दिए जाएंगे। अभी पात्रों की नए सिरे से जांच शासन के आदेश पर की जा रही है ताकि अपात्र व्यक्ति को कांशीराम आवास न मिल जाए।

इनसेट -------------------
आए दिन भवनों से चोरी हो रहा है कालोनी से सामान
महोबा। महीनों से कब्जे की बाट जोह रही कांशीराम कालोनी से अराजक तत्व आए दिन बिजली के बोर्ड और नल की फिटिंग उखाड़कर ले जाते हैं। जिससे कब्जे के अभाव में भवनों की देखरेख भी ठेकेदार समय पर नहीं कर पाते। कांशीराम आवास के ठेकेदार भारत सिंह, प्रभुदयाल, मूलचंद्र प्रजापति आदि ने बताया कि कालोनी का पूरा निर्माण कार्य दिसंबर माह में ही करा दिया था। हर मकान में ताले पड़े हैं। चरखारी कसबे से बाहर कालोनी बनी होने के कारण आए दिन अराजक तत्व बिजली के बोर्ड और मैन स्विच पानी के पाइप उखाड़कर ले जाते हैं जिससे ठेकेदारों को लाखों रुपए की क्षति उठानी पड़ रही है। हैंडओवर के नाम पर कार्यदाई संस्था डूडा चुप्पी साधे हुए है।

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