कबरई पत्थर मंडी में काम बंद, 10 हजार श्रमिक बेकार

Mahoba Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
कबरई (महोबा)। एक साल से कबरई मंडी पर छाए संकट के बादल छटने का नाम नहीं ले रहे हैं। जुलाई 2011 से किसी न किसी बहाने मंडी पर प्रशासन का चाबुक चल रहा है। इससे श्रमिकों को यहां काम नहीं मिल पा रहा है और मंडी के कार्यक्षेत्र पहाड़ों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। काम न मिलने से 10 हजार से ज्यादा श्रमिक बेकार हो गए हैं।
एक सप्ताह के अंदर कबरई मंडी में तेजी से हुई विस्फोटकाें की धरपकड़ के चलते मंडी के विस्फोटक डीलरोें ने पुलिस के डर के कारण बिक्री बंद कर दी है। उनके आफिस गोदामों में ताले पड़े हैं जिससे मंडी में चल रहे तीन सौ खान पट्टों में काम बंद हो गया। पहाड़ों में सन्नाटा छा गया। दैनिक मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करने वाले श्रमिक रोजी रोटी के लिए मोहताज हो गए हैं। श्रमिक रमेश कुशवाहा, कुल्लू रैकवार, शिव प्रसाद, रजनी अहिरवार, रमाशंकर आदि ने बताया कि पिछले 8 जून से पहाड़ों पर खनन कार्य के लिए श्रमिक नहीं जा रहे हैं। उनका आरोप है कि पहाड़ों पर पुलिस के वाहन जाते हैं और श्रमिकों को अकारण ही मारने पीटने लगते हैं साथ ही अनावश्यक पूछताछ कर विस्फोटक सामग्री के बारे में जानकारी करते हैं। मंडी के पट्टाधारकों ने विस्फोटक का प्रयोग करने वाले ब्लास्टर मैन भी अपनी पहाड़ी में नियुक्त कर रखें हैं। जिनकी देखरेख में ही खनन कार्य होता है और ब्लास्टिंग की जाती है। साथ ही खान सुरक्षा अधिनियम 1952 के तहत खान सुरक्षा निदेशालय द्वारा खनन की अनुमति भी दी गई है। इसके बाद भी विस्फोटकों की धरपकड़ से काम बंद होना हास्यास्पद लगता है।
पत्थर व्यापारी विजय सिंह, नासिर अली ने कहा कि यहां 30 हजार से अधिक श्रमिक पहाड़ाें पर काम करते हैं लेकिन पुलिस की सख्ती से कोई भी पहाड़ पर जाने के लिए तैयार नहीं हैं। वंशीधर सेंगर ने कहा कि एक साल से मंडी पर प्रशासन का चाबुक चल रहा है जिससे राजस्व को जहां करोड़ों की क्षति हो रही है, वहीं श्रमिक भी काम न मिलने के कारण महानगरों की तरफ पलायन के लिए मजबूर हो गए हैं। कबरई मंडी के अलावा पचपहरा, गौहारी, रमकुंडा और डहर्रा में भी काम बंद हो गया है। पत्थर मंडी के लोगों ने जिलाधिकारी से मंडी के संचालन में आने वाली कठिनाइयाें को दूर करने की मांग की गई है।


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