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समर्थन मूल्य की चाह में ठगे से लौट रहे हैं किसान

Mahoba Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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महोबा। सरकारी गेहूं खरीद केंद्राें में भी किसानाें को निराशा ही हाथ लग रही है। समर्थन मूल्य का लाभ पाने की ललक में पहुंचने वाले कृषक खुलेआम ठगे जा रहे हैं। कुछ जगह तो खरीद हो रही है पर अधिकतर केंद्राें पर संसाधन अभाव के चलते खरीद पूरी तरह ठप है। इसके बावजूद 11998 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 10719 मीट्रिक टन खरीद होने से महकमे के जिम्मेदार अधिकारियाें ने राहत की सांस ली है। जिले में सरकारी गेहूं खरीद केंद्राें में कृषकाें की लंबी लाइन लग रही हैं। जिले में 19 क्रय केंद्राें में से महज 10 पर ही खरीद चल रही है। सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य 1285 रुपए का लाभ पाने के लिए किसान तो बड़े पैमाने पर यहां पहुंच रहे हैं, लेकिन कुछ जगह खरीद न होने और अव्यवस्थाआें के चलते उन्हें निराशा होना पड़ रहा है। क्रय केंद्राें के माध्यम से अब तक 11998 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 10719 मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है। 30 जून तक होने वाली खरीद का समय निर्धारित होने के कारण अधिकारियाें को लक्ष्य पूर्ति की उम्मीद है जबकि पिछले कई वर्षों से क्रय केंद्र खरीद लक्ष्य से पिछड़ रहे थे। मई में ही लक्ष्य के सापेक्ष 85 प्रतिशत से अधिक खरीद होने से महकमा भी बेफिक्र हो गया है। परिणामतय केंद्राें में गेहूं की उपज बेचने के लिए जाने वाले कृषकाें को प्रभारी भी तवज्जो नहीं दे रहे हैं। कृषक राजेंद्र सिंह, बलराम, रविंद्र सिंह, तिज्जू और कृष्णकांत का कहना है कि केंद्र में गेहूं ले जाने के बाद भी खरीद नहीं की जा रही है। चरखारी के क्रय केंद्र में गेहूं बेचने के लिए पहुंचे कृषक देव सिंह, जय सिंह जरौली ने बताया कि गेहूं की सफाई के नाम पर भी कटौती की जा रही है। तौल कराने में भी मेहनत करना पड़ रही है। अव्यवस्था के चक्कर में दो-दो दिन तक ठहरना पड़ रहा है। कृषकाें का कहना है कि मंडी और आढ़तियाें के यहां गेहूं बेचने में भाव तो कम मिल रहा है, लेकिन मशक्कत कम करना पड़ रही है। कटौती भी नहीं ली जा रही है। धन के लिए अवश्य दो चार दिन के लिए टरकाया जा रहा है। मामले पर डिप्टी आरएमओ आरएस यादव का कहना है कि खरीद का लक्ष्य 85 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। गोदाम में पुराना गेहूं डंप नहीं है। नई खरीद का गेहूं रखने के लिए समुचित प्रबंध है। मानकाें के अनुसार गेहूं न होने पर कृषकाें के हर्जे खर्चे पर छनाई कराई जाती है। उन्हाेंने कहा कि बारदाना और धन की समस्या आड़े आने से कहीं-कहीं केंद्रों में खरीद प्रभावित है लेकिन लक्ष्य पूर्ति के बाद भी सरकार द्वारा निर्धारित 30 जून तक खरीद केंद्राें में चलती रहेगी।
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