योजना को मंजूरी मिलने पर बहुरेंगे चंदेल कालीन सरोवर के दिन

Mahoba Updated Wed, 23 Oct 2013 05:41 AM IST
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महोबा। अब जल्द ही चंदेल कालीन मदन सागर सरोवर के दिन बहुरेंगे। सरोवर की दशा सुधारने के लिए जल निगम सिविल शाखा ने 61.21 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। योजना में 70 फीसदी केंद्र सरकार और 30 फीसदी प्रदेश सरकार व्यय करेगी। इस परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद चंदेल कालीन सरोवर का नक्शा ही बदल जाएगा।
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वर्ष 1182 में चंदेल शासक मदन वर्मन ने बस्ती के बीचाेंबीच 90 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मदन सागर का निर्माण कराया था। इसी तालाब से शहर में पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन पिछले दो दशक से इस तालाब में जलकुुंभ में पटी पड़ी है। वहीं दशकाें से तालाब की सिल्ट सफाई न कराए जाने से तालाब में जलभंडारण क्षमता घट गई है। मदन सागर सरोवर के तट पर सीडब्ल्यूआर टैंक बनाया गया है। इस तालाब से सैकड़ाें रैक्वार समाज के लोगाें की सिंघाड़े की खेती से गुजर बसर चल रही है। लेकिन आसपास के लोगाें ने शौचालय के टैंक के पाइप व गंदी नालियां तालाब में डाल दी हैं जिससे पानी प्रदूषित हो रहा है।
मदन सागर का जल स्वच्छ करने के लिए जल निगम द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव में तालाब में फैली जलकुंभी और चारे की सफाई, सिल्ट सफाई, तालाब में पड़े नाले और नालियाें का पानी सीवर लाइन बनाकर उसमें डाले जाने और सीवर लाइन से गंदा पानी ले जाकर दूर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही गरीब वर्ग के लोगाें के लिए मदन सागर के किनारे सुलभ शौचालय बनाए जाएंगे। जिससे तालाब में किसी भी तरह की गंदगी न हो सके।
नावाें से पर्यटक करेंगे खकरामठ का दीदार
महोबा। जल निगम द्वारा बनाई गई परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद सरोवर के स्वच्छ होने पर तालाब में बोट की व्यवस्था की जाएगी। जिससे पर्यटक सरोवर के बीचाेंबीच बने खकरामठ का नजारा कर सकें। जल निगम के अधिशाषी अभियंता जनार्दन सिंह का कहना है कि तालाब में फैली जलकुंभी को समूल नष्ट करने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाएगा। साथ ही तालाब के किनारे प्लांटेशन कर ऐतिहासिक तालाब की खूबसूरती बढ़ाई जाएगी।

40 लाख रुपये से हुई थी दस फीसदी खुदाई
महोबा। चालीस लाख रुपये खर्च कर मदन सागर की खुदाई कराई गई थी। मशीनाें के बजाय श्रमिकाें को लगाए जाने से डेढ़ माह में ही बारिश शुरू हो जाने पर मदन सागर के दस फीसदी हिस्से की ही खुदाई हो सकी थी। वर्ष 2008 में तत्कालीन जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत के निर्देशन में मदन सागर की खुदाई का कार्य कराया गया था। कार्य की देखरेख के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगाए गए थे। क्षेत्र के दर्जनाें गांव के लोगाें को डेढ़ माह तक तालाब खुदाई के नाम पर रोजगार तो मिला लेकिन श्रमिकाें ने भी सरकारी पैसे का खुदाई के नाम पर जमकर बंदरबांट किया था। श्रमिकाें की भारी फौज के चलते तमाम श्रमिक इधर-उधर बैठकर टाइम काटते रहे और 40 लाख रुपये खर्च होने के बाद दस फीसदी भी तालाब की खुदाई नहीं हो सकी थी।
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