शासन की उपेक्षा से दम तोड़ रही नौटंकी विधा

Mahoba Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
उपेक्षा के चलते मुफलिसी से परेशान हैं नौटंकी कलाकार
दीपेश तिवारी
महोबा। पश्चिमी सभ्यता के हावी होने से बुंदेली विधा नौटंकी का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। अब महफिलाें में न तो कद्रदान पहुंचते हैं और न ही नौटंकी विधा को देखने को भीड़ जुटती है। महंगाई की मार और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते कलाकार भी मुफलिसी से चलते इस विधा से धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं।
बुंदेलखंड की नौटंकी विधा की उपेक्षा से कलाकार आर्थिक तंगहाली की मार के चलते इस बुंदेली विधा से दूर हो रहे हैं। कभी शादी ब्याह से लेकर विभिन्न रस्माें में नौटंकी कला का प्रदर्शन गौरव समझा जाता था। राजा महाराज भी शुभ अवसराें पर नौटंकी कराते थे। जहां हजाराें की संख्या में लोग कलाकाराें के उत्साह वर्धन के लिए पहुंचते थे। कलाकाराें को जहां कार्यक्रम आयोजक उत्साह वर्धन के लिए उन्हें उपहार से नवाजते थे, वहीं कार्यक्रम में दर्शक मनोरंजन के साथ-साथ साहित्य से जुड़े नाटक और खेलाें में अच्छे अभिनय के लिए मनमाना पुरस्कार देते थे। कद्रदान दर्शकाें की तालियाें की गड़गड़ाहट से कलाकाराें का उत्साह दोगुना हो जाता था। पिछले एक दशक से पश्चिमी सभ्यता के प्रवाह में डीजे, आर्केस्ट्रा और टीवी सीरियलाें के प्रसारण से बुंदेली विधा नौटंकी कलाकार हाशिए पर आ गए। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते इस विधा से प्रसिद्ध नौटंकी कलाकार अब दूर होने लगे हैं। इस विधा को जीवित रखने के लिए शासन प्रशासन ने भी नौटंकी कलाकाराें को पेंशन जैसी सुविधाएं मुहैया नहीं कराईं। दो दशकाें से नौटंकी, रामलीला और आल्हा मंच में गायन और अभिनय कर रहे बाबा रमाशंकर का कहना है कि महंगाई में रात भर मेहनत के बाद मिलने वाला पारिश्रमिक पर्याप्त नहीं है। जीवन भर दर्शकाें का मनोरंजन कराने के बाद पेंशन का भी सहारा नहीं है। वहीं हास्य कलाकार अलरा निवासी द्वारिका और महोबा के हरगोविंद, पनवाड़ी के नकरा निवासी जानकी, रमेश औंता का कहना है कि नौटंकी विधा के उत्थान के साथ कलाकाराें की जीविका के लिए पेंशन की सुविधा सरकार को करना चाहिए। धवारी के पूर्व प्रधान नौटंकी कलाकार घनश्याम वर्मा, खरेला के सिकंदर, किशोरी अनुरागी, गोरेलाल प्रजापति, रामकुमार, मान सिंह, उदयभान आदि ने कहा कि नौटंकी विधा का प्रचलन धीरे-धीरे सरकार की उपेक्षा के चलते विलुप्त होने की दहलीज पर है।
पुण्य स्मृति समारोह कल
खरेला (महोबा)। बुंदेलखंड में नौटंकी विधा के साथ-साथ कीर्तन, साहित्य के क्षेत्र में पांच दशक तक महत्वपूर्ण योगदान करने वाले स्व. नाथूराम विश्वकर्मा की द्वितीय पुण्य स्मृति समारोह में कई जिलाें के प्रसिद्ध कलाकार शिरकत करेंगे। कार्यक्रम संयोजक श्यामसुंदर विश्वकर्मा ने बताया कि परंपरागत पुण्य स्मृति समारोह में 9 दिसंबर को गृह नगर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में हमीरपुर, महोबा, झांसी, उरई, कानपुर, बांदा के प्रसिद्ध कलाकार आएंगे।

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