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Updated Mon, 05 Jun 2017 11:16 PM IST
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चंदेल कालीन तालाब बना जीवन दायिनी
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महोबा।

भीषण गर्मी में 800 साल पुराने चंदेल राजओं द्वारा बनवाए गए तालाबों से ही शहरियों की प्यास बुझ रही है। यह तालाब यहां का जलस्तर भी मेनटेन रख रहे हैं। इसके बावजूद इन तालाबों को प्रशासन की बेरुखी झेलनी पड़ रही है।


चंदेल राजा मदन वर्मन ने 11 वीं शताब्दी में मदन सागर तालाब का निर्माण कराया था। जिसमें दो तरफ नहाने-धोने के लिए घाट भी बनाए गए थे। इस तालाब से तब महोबा के लोगों को पेयजल मिलता था। मदन सागर में अब जलकुंभी छा गई है। जिससे तालाब में कचड़ा बढ़ता जा रहा है। जलकुंभी पानी का बहुत बड़ा शोषक है। इससे मदन सागर का पानी तेजी से सूख रहा है।



शहर में 1963 में पेयजल योजना बनाई गई थी। उस समय शहर की आबादी 26 हजार थी। जो अब एक लाख से ज्यादा पहुंच गई है। यहां की अधिकांश पाइप लाइनें पांच दशक पुरानी है। जिससे जगह जगह लाइनें चोक हो गई है।

उनमें पानी दबाव नहीं बन पाता। जल निगम द्वारा वर्ष 2008 में महोबा पुर्नगठन पेयजल योजना के तहत 25 किमी दूर उर्मिल बांध से बिछाई गई प्लास्टिक की पाइप लाइन आए दिन टूट जाती है। जिससे पानी की समस्या पैदा हो जाती है।

यहां पर 120 लीटर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति की दर से रोजाना पानी की आवश्यकता है। जबकि सभी श्रोतों को मिलाकर 80 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन पानी की जलापूर्ति हो रही है। जिससे पानी की समस्या दिन प्रतिदन विकराल होती जा रही है।

महोबा शहर पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां नलकूप सफल नहीं है। भूमि समतल नहीं है। इसलिए पाइप लाइनों में कहीं दवाब अधिक हो जाता है। कहीं शूून्य हो जाता है। पानी की कमी को देर करने के लिए चरखारी बाईपास पर बनाए गए दो नलकूप भीषण गर्मी में जल स्तर घटने पर जवाब दे देते हैं।

चंदेलकालीन कुएं मदनऊ और सदनऊ पर जल स्तर घटने का कोई असर नहीं पड़ता है। सूखे के समय में भी इन कुंओं ने शहर में पानी की आपूर्ति कर लोगों की प्यास बुझाई है। जल संस्थान ने इन कुओं में पंप लगा दिए हैं। जहां से शहर के कुछ हिस्सों में पानी की आपूर्ति की जाती है। इन कुओं के अंदर कूड़ा न जा सके। इसके लिए जाल लगाकर कुओं को ऊपर से ढक दिया गया।

शहर मेें प्रतिदिन 80 से 90 लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है। कुछ मोहल्लों में पानी की समस्या की जानकारी मिली है। जिसका जल्द ही निराकरण कराया जाएगा। - एसके वर्मा, अवर अभियंता जल संस्थान, महोबा

- जिले में जलस्तर मेनटेन किए हैं 800 वर्ष पुराने तालाब, फिर भी झेल रहे प्रशासन की बेरुखी
- पेयजल योजना के तहत 1963 में बनी थी पहली योजना, जगह-जगह हो गई पाइप लाइन चोक

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