मनचाही पोस्टिंग के लिए हो रहा था लेनदेन

Maharajganj Updated Tue, 22 Oct 2013 05:39 AM IST
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महराजगंज। गोरखपुर में जिले के तीन खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के लाखों रुपये के साथ पकड़े जाने में मनचाही पोस्टिंग की बात सामने आई है।
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बेसिक शिक्षा सचिव ने जिले के 448 प्राइमरी शिक्षकों के पदोन्नति की स्वीकृति दी थी। इनमें से 72 शिक्षकों का गैर जनपद स्थानांतरण हो गया। तीन शिक्षक निलंबित और एक शिक्षक बर्खास्त हैं। ऐेसे में कुल 372 शिक्षकों के पदोन्नति के बाद आजकल तैनाती की कार्यवाही चल रही थी। इन शिक्षकों को प्राथमिक विद्यालय पर प्रधानाध्यापक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर सहायक अध्यापक बनाया जाना है। इसी क्रम में 10 अक्टूबर को 97 महिला व विकलांग शिक्षक की काउंसिलिंग हुई थी। पदोन्नति के लिए इन शिक्षकों से तीन-तीन स्कूल विकल्प के रूप में लिए गए हैं। विकल्प लेने के बाद भी अभी तक पदोन्नति पाए किसी शिक्षक को नए विद्यालय पर तैनाती नहीं दी गई है। बताया जाता है कि तैनाती इसलिए नहीं दी गई है ताकि मनचाही पोस्टिंग के रुपये वसूले जा सकें।
बीएसए की भूमिका भी संदिग्ध : संजय
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजय कुमार मिश्र का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पदोन्नति के नाम पर खंड शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षकों से जमकर रुपये वसूले। यह बात जब प्रकाश में आई तो इसे बीएसए को अवगत कराकर इस पर रोक लगाने की मांग की गई। बीएसए इस पर लगाम नहीं लगा सके। इसमें बीएसए की भी भूमिका संदिग्ध है।
उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी व महामंत्री उपेन्द्र पांडेय का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग में पदोन्नति के नाम पर खंड शिक्षा अधिकारियों ने जमकर मनमानी की। शिक्षकों को मनचाहा विद्यालय देने के लिए सेटिंग की। इसकी शिकायत बीएसए से की गई थी लेकिन वे इस मुद्दे पर चुप्पी साध गए। आखिरकार मामला सामने आ ही गया।
खंड शिक्षा अधिकारियों के गिरफ्तारी की सूचना मिली है। मामले की जांच स्थानीय स्तर पर भी कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग की जांच टीम को जो भी सहयोग की जरूरत होगी, दी जाएगी।
-सौम्या अग्रवाल, डीएम
पहले भी पौने दो करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था
महराजगंज। बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का मामला नया नहीं है। इसके पहले भी इसका दामन दागदार रहा है।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्रतिवर्ष विभाग को करोड़ों रुपये मिलते हैं। वर्ष 2009 में तत्कालीन बीएसए डॉ. रामहजूर के कार्यकाल में बेसिक शिक्षा विभाग में पौने दो करोड़ रुपये के घोटाले का मामला आया। इसमें चेक गायब कर सर्वशिक्षा अभियान की धनराशि हड़पने की कोशिश की गई थी। मामला पकड़ में आने पर बीएसए डॉ. रामहजूर ने सर्वशिक्षा अभियान के एएओ ओमप्रकाश और लेखाकार यशवंत सिंह के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। सांसद हर्षवर्धन की पहल पर बाद में बीएसए डॉ. रामहजूर का स्थानांतरण देवरिया जिले में डायट प्रवक्ता पद पर कर दिया गया था।
आरोपी कई माह तक कार्यालय छोड़कर फरार रहे। पौने दो करोड़ रुपये के घोटाले के एक आरोपी का नाम भी इस नए मामले में आया है।
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