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सुरक्षित प्रसव के नाम पर वसूली

Maharajganj Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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महराजगंज। बहदुरी एवं बृजमनगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर जननी सुरक्षा योजना में जमकर गड़बड़ी की जा रही है। यहां सुरक्षित डिलीवरी के नाम पर वसूली करने के साथ प्रोत्साहन राशि में चेक की जगह नकद रुपये दिए जा रहे हैं। उसमें भी कटौती की जा रही है। इस बात का खुलासा शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना एवं जननी सुरक्षा योजना के ओरिएंटेशन कार्यशाला में हुआ। इसका आयोजन ग्राम नियोजन केंद्र ने किया।
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कार्यशाला में बहदुरी क्षेत्र की बभनी निवासी लैलूनिशा ने बताया कि तीन महीने पहले उसकी बहू की डिलीवरी कोल्हुई एएनएम सेंटर पर हुई। उससे सुरक्षित डिलीवरी के लिए 500 और दवा के लिए 200 रुपये लिए गए। उसने बताया कि जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि दो महीने बाद 1400 रुपये की चेक की जगह 1200 रुपये नकद दिए गए। उसकी बहू के नाम का चेक वहीं खड़े किसी दूसरे व्यक्ति को दे दिया गया। नियोजन केंद्र पैक्स की सदस्य सुनीता ने एनआरएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार से बताया कि बनकटी सामुदायिक केंद्र पर सुरक्षित प्रसव कराने नाम पर 500-700 रुपये लिए जाते हैं। इतना ही नहीं जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि के लिए 300 रुपये सुविधा शुल्क लिया जाता है। दोनों की शिकायत सुनकर कार्यशाला में उपस्थित सभी स्वास्थ्य अधिकारी सकते में आ गए। जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने कहा कि इस मामले से सीएमओ को अवगत कराया जाएगा।
इस संबंध में सीएमओ डॉक्टर एके श्रीवास्तव ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत सभी जांच एवं दवाएं नि:शुल्क हैं। जच्चा से प्रोत्साहन राशि एवं सुरक्षित प्रसव कराने के लिए धन की डिमांड करना अनुचित है। मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आशा कोई हेल्प नहीं करती
बृजमनगंज ब्लाक के बभनी निवासी लैलूनिशा ने बताया कि क्षेत्र की आशा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने बहू के गर्भधारण से लेकर प्रसव कराने में कोई सहायता नहीं की। उसने बताया कि बिना प्रसूता के साथ गए आशा को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया गया।
डिलीवरी के बाद 48 घंटे अस्पताल में भर्ती जरूरी
महराजगंज। कार्यशाला में सिसवा पीएचसी के प्रभारी चिकित्सक डॉक्टर जय कुमार ने बताया कि प्रसव के बाद 48 घंटे तक अस्पताल में भर्ती रहना आवश्यक है। इस समय में जच्चा-बच्चा के करीब एक दर्जन बीमारियों का पता चल जाता है। डॉक्टर जय कुमार ने बताया कि प्रसव के बाद मां और नवजात का खून मैच नहीं खाने पर बच्चा पीलिया का शिकार हो सकता है। यह रोग प्रसव के 48 घंटे के अंदर कभी भी हो सकता है। यही नहीं प्रसव के प्रथम घंटे में ही बच्चे को स्तनपान कराना आवश्यक होता है। यदि बच्चा स्तनपान नहीं करता है तो उसका सही समय पर चला जाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ सीएमओ डॉक्टर एके श्रीवास्तव ने दीप जलाकर किया। यहां एसीएमओ आरसीएच डॉक्टर एसके सिंह, पीडी जीएनके विभाष चटर्जी, संपूर्ण स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक कल्पना शुक्ला, एएनएम और आशा उपस्थित रहीं।

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