बचाव के लिए 22 लाख मिले

Maharajganj Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
महराजगंज। शीतलहर का प्रकोप शुरू हो गया है। तापमान लगातार गिर रहा है, लेकिन प्रशासन बेपरवाह है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी जिले में शेल्टर होम नहीं बने हैं। हालांकि सरकार ने कंबल वितरण और अलाव के लिए 22 लाख रुपये दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने गरीबों को ठंड से बचाने के लिए हर जिले में शेल्टर होम बनवाने का निर्देश दिया है। ठंड बढ़ गई है, लेकिन कहीं शेल्टर होम नहीं बनवाया गया है। अलाव जलाने और कंबल वितरण को लेकर भी प्रशासन सक्रिय नहीं है। जिम्मेदार लोगों ने शासन से आई चिट्ठी का भी संज्ञान नहीं लिया है।
ठंड से बचाव के लिए शासन ने 15.65 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। जिले को 22 लाख रुपये मिले हैं। हर तहसील में 5.50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पर अभी तक प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू नहीं की गई हैं। इस संबंध में एडीएम बसंत राम प्रजापति का कहना है कि शासन की गाइड लाइन आ गई है, लेकिन उसका अध्ययन नहीं किया गया है। शेल्टर होम बनवाने की योजना बड़े शहरों के लिए है। यहां उसकी खास जरूरत नहीं है। जल्द ही ठंड से बचाव के लिए प्रबंध किया जाएगा।
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गरीबों के लिए बनना है शेल्टर होम
शेल्टर होम का भावार्थ बचाव घर से है। बड़े शहरों में कई लोग निराश्रित रहते हैं। उनके रहने का कोई ठिकाना नहीं होता है। लिहाजा उनको ठंड से बचाने के लिए कोर्ट ने बचाव घर बनाने को कहा है। बड़े शहरों में इसे स्थायी रूप से तैयार किया जाएगा। छोटे शहरों में टेंट से अस्थायी शेल्टर होम तैयार किया जाना है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन इस संबंध में कोई तैयारी नहीं कर रहा है।
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जिले में नहीं हुई ठंड से मौत
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में ठंड से कोई मौत नहीं होती है। पिछले साल ठंड से कई लोगों की मौत हो गई थी, पर सरकारी रिकार्ड में इसका उल्लेख नहीं है। प्रशासन का मानना है कि यहां ठंड से कोई मौत नहीं होती है। ठंड से हुई मौत में पोस्टमार्टम कराना होता है, लेकिन यहां कोई ऐसा मामले सामने नहीं आया।
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ठंड से मौत पर मिलेंगे डेढ़ लाख रुपये
कड़ाके की ठंड में अगर किसी की मौत होती है तो उसके परिवार वालों को सरकारी खजाने से डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पहले यह रकम एक लाख रुपये थी। अब उसे बढ़ा दिया गया है। फिलहाल जिले में इसका कोई मायने नहीं है। प्रशासन ठंड से हुई मौत को मानने के लिए तैयार नहीं है।
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हथकरघा निगम और यूपिका से खरीदे जाएंगे कंबल
प्रशासन उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव एसोसिएशन लिमिटेड (यूपिका) और उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड से कंबल की खरीद करेगा। कंबल की कीमत किसी भी दशा में 500 रुपये प्रति पीस से अधिक नहीं होगी।
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कंबल वितरण करने का प्रबंध नहीं
जिले में गरीबों को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए अभी तक कोई प्रबंध नहीं किया गया है। प्रशासन हालत बदतर होने का इंतजार कर रहा है। हालांकि इस मद में बजट आवंटित हो चुका है। उसके बावजूद प्रशासनिक संवेदनहीनता समझ से परे है।
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पिछले साल 1715 कंबल खरीदे गए
ठंड से बचाव के लिए पिछले साल प्रदेश को 3.53 करोड़ रुपये मिले थे। जिले को 8.50 लाख रुपये मिले। पहले चरण में 1107 और दूसरे चरण में 608 कंबल खरीदे गए। इस तरह पिछले साल 1715 कंबल खरीदे गए थे। अलाव के लिए 2,10,396 रुपये खर्च किए गए थे।

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