हरित क्रांति विस्तार योजना में छले गए किसान

Maharajganj Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
महराजगंज। हरित क्रांति विस्तार योजना में बडे़ पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। इस योजना में चयनित किसानों के खेतों की मुफ्त जुताई, बुआई होनी थी। इसके लिए जिले के आठ ब्लाकों से 1841 किसानों का चयन किया गया था। फसल कट गई, लेकिन किसानों को योजना का लाभ नहीं मिला। चयन में भी भेदभाव करने का आरोप है। सीडीओ ने योजना की पूरी फाइल तलब की है।
इस योजना में चार करोड़ अट्ठाइस लाख सतासी हजार रुपये धान की प्रदर्शनी पर खर्च करने का इस्टीमेट तैयार किया गया। इसमें से 1.20 करोड़ रुपये की बीज सप्लाई शासन स्तर से हुई है। 1.80 करोड़ रुपये किसानों को जुताई और सिंचाई मद में दिए जाने थे। लेकिन उसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इसके अलावा 80 लाख रुपये का माइक्रोन्यूट्रिएंट दिया जाना था। इसकी जिम्मेदार यूपी एग्रो को सौंपी गई थी। फसल कट गई मगर वितरण नहीं हुआ। 42 लाख रुपये से खरपतवार नाशक प्रेटिलाक्लोर नामक दवा की सप्लाई की गई। यह दवा विभिन्न ब्रांड से बाजार में बिकती है। 500 एमएल बाटल पर 215 रुपये अंकित है, लेकिन बिकती है 140 रुपये में। इसी तरह थोर ब्रांडनेम के एक लीटर पर प्रिंट मूल्य 420 रुपये है। मगर बिक्री रेट 260 रुपये है। जबकि योजना में इसका भुगतान 396 रुपये की दर से किया गया। यही नहीं दवाएं भी उन लोगों की दुकानों से खरीदी गई हैं जो या तो कृषि विभाग में मुलाजिम हैं या फिर उनके रिश्तेदार हैं। जिनसे दवा ली गई है, उनमें से एक व्यक्ति ऐसे हैं जो खाद की कालाबाजारी में जेल जा चुके हैं।
सीडीओ डॉ. वेदपति मिश्र का कहना है कि इस योजना में घोटाले की शिकायत उनको भी मिली है। विभाग से उसकी पत्रावली तलब की गई है। फिर उसके आधार पर जांच का सिलसिला शुरू हो जाएगा। बिना टेंडर एक लाख से अधिक की दवा आपूर्ति नहीं हो सकती है। अगर टेंडर नहीं हुआ तो गलत है।
क्या लिखा है सीडीओ ने
इस प्रकरण को लेकर सीडीओ ने 22 सितंबर को उप कृषि निदेशक को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने पूछा था कि कीटनाशक दवा की खरीद कहां से और कितनी मात्रा में की गई है। उस दवा का वितरण किस ब्लाक के कौन-कौन से किसानों में किया गया है। उससे संबंधित बिल बाउचर और वितरण सूची भी मांगी गई है। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था। लिहाजा 29 सितंबर को ही सप्ताह पूरा हो गया, लेकिन पत्रावली मुहैया नहीं कराई गई। उसके बाद रिमाइंडर भेजने पर केवल किसानों की सूची सीडीओ को मुहैया कराई गई।
कोट
हरित क्रांति योजना के तहत धान की प्रदर्शनी उनके कार्यकाल की नहीं है। किसानों को केवल धान बीज और खरपतवार नाशक दवा का ही वितरण किया गया है। बाकी रकम बांटने में देरी हुई है। लिहाजा अब वे उस धन को शासन में सरेंडर कर देंगे। अब किसी भी दशा में उसका वितरण नहीं किया जाएगा। सीडीओ ने जितने दस्तावेज मांगे थे, उसे मुहैया करा दिया गया है।
-अविनाश चन्द तिवारी, उप निदेशक कृषि

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