जिला मुख्यालय को रेलमार्ग से जोड़ने की जंग

Maharajganj Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
महराजगंज। जिला मुख्यालय रेलमार्ग से अछूता है। राजनेताओं को इसकी याद केवल चुनाव के समय में आती है। इसकी जंग को मुकाम पर पहुंचाने के लिए एक सेवानिवृत्त कर्मचारी तीन साल से लगे हैं। इसके लिए उन्होंने जन सूचना अधिकार अधिनियम को हथियार बनाया है।
नगर के सिविल लाइंस निवासी दयानंद गुप्ता मलेरिया सर्वेक्षण निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं। वह महराजगंज जिला मुख्यालय को रेलमार्ग से जुड़वाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए 21 जुलाई 2009 को रेलवे बोर्ड को जन सूचना के तहत प्रार्थना पत्र भेजा। सूचना नहीं मिली तो 27 अगस्त 2009 को अपील दाखिल की। इस पर मिली सूचना में बताया गया कि अक्टूबर 2004 में कप्तानगंज-आनन्दनगर वाया महराजगंज रूट का सर्वे कराया गया था। 63.65 किलोमीटर लंबे ट्रैक के निर्माण पर 203.05 करोड़ रुपये लागत आने का आकलन किया गया। इसका रेट आफ रिटर्न -4.04 प्रतिशत के साथ अलाभकारी है। लिहाजा इसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने 19 दिसंबर 2010 कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखा। इसके चलते फरवरी 2011 में प्रस्तुत रेल बजट में तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी ने जिला मुख्यालय को रेलमार्ग से जोड़ने के लिए नए रूट घुघली-आनन्दनगर वाया महराजगंज का सर्वे कराने की घोषणा की।
करीब चार महीने बाद जब कोई कार्यवाही नहीं शुरू हुई तो उन्होंने 28 जून 2011 को रेलवे बोर्ड को जन सूचना अधिकार के तहत प्रार्थना भेजकर स्थिति की रिपोर्ट मांगी। जवाब नहीं मिलने पर रेलवे बोर्ड में 12 सितंबर को पहली अपील दाखिल की। इसके बाद उन्होंने 12 दिसंबर 2011 को केन्द्रीय सूचना आयोग के समक्ष दूसरी अपील प्रस्तुत की। इसके साथ ही 27 फरवरी 2012 को राष्ट्रपति को आग्रह पत्र भेजकर सूचना दिलवाने की मांग की। इसके बाद बीते 14 जून को केन्द्रीय सूचना आयोग में सुनवाई शुरू हुई। आयोग में रेलवे बोर्ड के सीनियर अधिकारी ए. रहमान हाजिर हुए। महराजगंज में दयानंद की आडियो कांफ्रेंस के जरिए बात कराई गई। उनको आर्डर की कापी तीन जुलाई को सूचना आयोग ने रिसीव कराई। इसमें बताया गया कि रेलवे के इस प्रोजेक्ट को योजना आयोग ने स्वीकृति दे दी है। लेकिन इस पर खर्च होने वाली धनराशि का आधा हिस्सा प्रदेश सरकार को वहन करना होगा। इस आधार पर रेलवे बोर्ड ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है।
अब प्रदेश सरकार से 50 फीसदी रकम देने के बारे में जानकारी लेने के लिए दयानंद ने 23 जुलाई को मुख्यमंत्री कार्यालय को आरटीआई भेजा। प्रदेश सरकार से कोई सूचना न मिलने पर 22 सितंबर को अपील की। उसके बाद नौ नवंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अपीलीय अधिकारी ने पत्र भेजा। इसमें बताया गया कि उनका प्रार्थना पत्र प्रमुख सचिव नियोजन विभाग को अंतरित किया जा चुका है। लिहाजा यह अपील मुख्यमंत्री कार्यालय में ग्राह्य नहीं है। सूचना हासिल करने के लिए संबंधित विभाग में अपील प्रस्तुत करें। अब उन्होेंने 27 नवंबर को नियोजन विभाग को अपनी पहली अपील दाखिल की।

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