जम्मू से काठमांडू तक बिक रहा महराजगंज का केला

Maharajganj Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। केला उत्पादन को लेकर महराजगंज देश का दूसरा भुसावल बन गया है। यहां की माटी में पैदा हुआ केला जम्मू-कश्मीर से लेकर नेपाल की राजधानी काठमांडू तक मिठास घोल रहा है। जिले के 2000 काश्तकारों ने करीब 1200 हेक्टेयर में ग्रैंडनैन (जी-9) प्रजाति का टिश्यू कल्चर पौधा लगाया है। इसमें 10 लाख कुंतल तक केले की पैदावार होने का अनुमान है।
जिले के निचलौल, सिसवा, घुघली, फरेन्दा और पनियरा ब्लाक मेें केले की व्यापक स्तर पर खेती की गई है। उद्यान विभाग ने 50 हेक्टेयर का टारगेट निर्धारित कर चयनित प्रति किसानों को 2228 पौधे मुफ्त में दिए। बाकी किसानों ने अपने रुपये से केले की खेती की है। टिश्यू कल्चर केला लगाने के लिए प्रति हेक्टेयर 3086 पौधे की जरूरत होती है। एक हेक्टेयर केले की खेती में दो से ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं। 14 महीने में फसल तैयार होने पर प्रति हेक्टेयर 4-5 लाख रुपये आते हैं। इस तरह उनकी पूंजी कम ही समय में दोगुनी हो जाती है। एक हेक्टेयर में 500-800 कुंतल केले का उत्पादन होता है। पहले जिले में भुसावल का केला छाया रहता था, लेकिन अब यहां उत्पादन बढ़ने से उसकी आवक शून्य हो गई है।
अब जिले से नेपाल के साथ ही देश के मुंबई, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तराखंड तक केले की सप्लाई हो रही है। निचलौल ब्लाक में गौतम पोद्दार बडे़ केला उत्पादक हैं। इस समय उनके बढ़या फार्म हाउस में करीब 40 एकड़ में केला लगा है।
इस संबंध में जिला उद्यान अधिकारी राजमणि शर्मा का कहना है कि केला उत्पादन के लिए जिले की माटी उपयुक्त है। किसान में इसमें रुचि भी दिखा रहे हैं। विभाग महज कुछ किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान मुहैया कराता है।
खेत से बिक जाती पैदावार
निचलौल ब्लाक के बैठवलियां गांव के रहने वाले शशिभूषण गुप्त नवीनतम खेती में काफी दिलचस्पी रखते हैं। उनके पास करीब 25 एकड़ खेत है। पहले वह आलू, बैंगन, गोभी, अदरक और हल्दी आदि की खेती करते थे। बाद में केले की तरफ रुख मोड़ा। इस समय करीब 14 एकड़ खेत में केले की खेती की है। उनका कहना है कि केला उत्पादन काफी फायदेमंद है। मार्केटिंग में भी कोई दिक्कत नहीं है। बड़े कारोबारी खेत से ही माल खरीद लेते हैं। नेपाल के एजेंट भी केला ले जाते हैं। केले की खेती बलुई, दोमट मिट्टी में अच्छी होती है।
केला उत्पादन में पुरस्कार
सिसवा ब्लाक के सबया गांव के अहिरौली टोला निवासी नागेन्द्र कुशवाहा केला उत्पादन में पुरस्कार भी पा चुके हैं। बीते चार सितंबर को गोरखपुर में आयोजितऔद्यानिक गोष्ठी में उद्यान मंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने करीब पांच एकड़ खेत में केला लगाया है।
अच्छा फायदा
शिकारपुर में रहने वाले रंजय कुमार मोदनवाल केले के बड़े कारोबारी हैं। उनका कहना है कि जिले के केले की डिमांड बाहर खूब है। वह पानीपत, सोनीपत, पंजाब, दिल्ली, देहरादून तक केले की सप्लाई करते हैं। इस समय वह 600-700 रुपये प्रति कुंतल केले की खरीदारी यहां कर रहे हैं। उसे 1000-1100 रुपये प्रति कुंतल बेच रहे हैं। पहले केला बाहर से मंगाते थे। अब उल्टा हो गया है।

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