स्टेडियम में खेल नहीं, उगा रहे धान

Maharajganj Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। शायद आपको जानकर आश्चर्य होगा कि महराजगंज स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों की जगह धान पैदावार हो रही है। यहां खेलने की जगह पर धान की फसल लहलहा रही है। स्टेडियम का निर्माण हुए 17 साल बीत गए, लेकिन अभी तक एक भी खिलाड़ी तैयार नहीं किया जा सका है। जबकि कुश्ती और हैंडबाल के दो प्रशिक्षक तैनात हैं। उनके पास नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (एनआईएस) डिप्लोमा का सर्टिफिकेट भी है।
दो अक्टूबर 1989 को जिला बनने के बाद स्पोर्ट्स स्टेडियम के निर्माण की कवायद शुरू हुई। 1995 में स्टेडियम बनकर तैयार हुआ। वर्ष 2005 में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बैडमिंटन और टेबल टेनिस के लिए इंडोर स्टेडियम बना। मैदान का पूरा क्षेत्रफल करीब 10 एकड़ है। शासन ने हैंडबाल और कुश्ती का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की है। हैंडबाल प्रशिक्षक के रूप में उप क्रीड़ाधिकारी फरीदा सिद्दीकी और कुश्ती प्रशिक्षक ओसामा जौहर तैनात हैं। सिद्दीकी को मोटी सेलरी मिलती है। जबकि जौहर को मानदेय। फरीदा की तैनाती करीब 12 साल पहले हुई थी। यहां हर साल 25-30 खिलाड़ियों को दोनों खेलों में प्रशिक्षण देने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं दिख रहा है। 17 साल की अवधि में इस स्टेडियम से केवल चंद बच्चों का ही स्पोर्ट्स कालेज में दाखिला हो सका है। इसके अलावा कोई उपलब्धि नहीं है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक की कौन चलाए, यहां का कोई खिलाड़ी प्रदेश स्तर पर भी कुछ खास नहीं कर सका है।
उप क्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि शासन से केवल दो ही खेल के प्रशिक्षण की व्यवस्था है। क्रिकेट, बैडमिंटन, वालीबाल, कुश्ती, कबड्डी, एथलेटिक्स और फुटबाल समेत सात खेलों के लिए कोच की डिमांड की गई थी, लेकिन स्वीकृत नहीं किया गया। स्टेडियम में राज्य कार्यालय के निर्देश पर 12-13 खेलों में ट्रायल कराया जाता है। जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 10 विधाओं में खेल कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर के उपकरण और व्यवस्था है। कुश्ती, हैंडबाल, वालीबाल, फुटबाल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, एथलेटिक्स की व्यवस्था है। प्रशिक्षक नहीं होने के कारण इस पर फोकस नहीं है।
यहां के बजट की बात करें तो फील्ड के रखरखाव में करीब चार लाख रुपये सालाना मिलते हैं। इसके अलावा खेल प्रोत्साहन समिति का गठन भी किया गया है। इसमें हैसियत प्रमाणपत्र, कैरेक्टर प्रमाणपत्र और शस्त्र लाइसेंस बनवाने वालों से दो हजार रुपये की रसीद कटवाई जाती है। इससे मिली रकम खेल पर खर्च की जाती है। यह रकम की भी अच्छी-खासी हो जाती है। साथ ही खेल सामग्री की आपूर्ति शासन स्तर से ही होती है। स्टेडियम के पास लाखों रुपये के खेल उपकरण हैं।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी बसंत राम प्रजापति का कहना है कि उनको जिले में आए हुए कम ही समय हुआ है। लिहाजा खेल प्रोत्साहन समिति के बारे में उनको अधिक जानकारी नहीं है।
खिलाड़ियों को पूरी निष्ठा के साथ प्रशिक्षण दिया जाता है। फील्ड अच्छी है। मिट्टी डाली जा रही है। मैदान के एक किनारे प्रशासनिक आदेश पर एक ठेकेदार को धान लगाने के लिए जगह दी गई है। ऐसा खर-पतवार को नष्ट करने के लिए किया गया है। खेल प्रोत्साहन समिति से स्टेडियम में आरओ और एसी लगवाया गया है। बैडमिंटन हाल की रिपेयरिंग भी कराई गई है। अभी तक कोई खिलाड़ी चमक नहीं सका है।
-फरीदा सिद्दीकी, उप क्रीड़ाधिकारी

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